Home Education भारतीय सेना के शौर्य की निशानी है ‘कारगिल विजय दिवस’

भारतीय सेना के शौर्य की निशानी है ‘कारगिल विजय दिवस’

कारगिल युद्ध दुनिया के सबसे ऊंचे क्षेत्रों में लड़े गए युद्धों में से एक है. कारगिल युद्ध को ऑपरेशन विजय (Kargil Vijay Diwas) नाम दिया गया था.

26 जुलाई 1999 वो ऐतिहासिक दिन जब भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को धूल चटाया था. इंडियन आर्मी के जवानों ने अपने अदम्य साहस और वीरता के बल पर कारगिल और उसके आसपास की अन्य चोटियों पर कब्जा जमाए हुए पाकिस्तानी सेना को खदेड़ कर उन चोटियों पर विजय हासिल की थी. हमारे वीर सैनिकों ने दुश्मन देश के सैनिकों को धूल चटाकर 18 हजार फीट की ऊंचाई पर तिरंगा लहराकर हर भारतीय का सीना चौड़ा कर दिया था. तभी से इस दिन को कारगिल विजय दिवस – Kargil Vijay Diwas के रूप में मनाया जाता है.

कारगिल विजय दिवस – Kargil Vijay Diwas

Kargil Vijay Diwas

इस युद्ध में विजय सिर्फ भारतीय सेना की नहीं बल्कि हर हिंदुस्तानी की थी. यह जीत उन मांओं की थी, जिन्होंने अपने लाडले को पाकिस्तान के खिलाफ इस युद्ध में भेजा था. कारगिल युद्ध की शुरुआत 8 मई 1999 को पाकिस्तान की ओर से हुई थी. जिसका भारतीय सेनाओं ने मुंहतोड़ जवाब दिया था. 40 दिनों तक चले इस युद्ध में भारतीय सेना ने ऐसा पराक्रम दिखाया कि पाकिस्तानी सैनिकों के छक्के छूट गए. यह युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल में लड़ी गई थी.

इस युद्ध में भारतीय सेना के करीब 527 वीर सपूत शहीद हुए थे. जबकि 1300 से ज्यादा जवान घायल हुए थे. कारगिल युद्ध के दौरान चला ‘ऑपरेशन विजय’ ‘26 जुलाई’ को ही सफल हुआ था. तभी से कारगिल के शहीद वीर जवानों की याद में इस दिन ‘कारगिल विजय दिवस’ का पालन किया जाता है. कार्यक्रम के दौरान देश के प्रधानमंत्री द्वारा युद्ध में शहीद हुए सेना के जवानों को श्रद्धांजलि दी जाती है.

पाकिस्तानी सैनिको द्वारा शुरू किए गए इस युद्ध में करीब 5 हजार पाक सैनिकों ने कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर घसपैठर कर कब्जा जमा लिया था. भारतीय सेना को इसकी जानकारी मिलते ही ये सभी पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन विजय अभियान (कारगिल विजय दिवस – Kargil Vijay Diwas) शुरू किया.

कारगिल युद्ध से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण जानकारी

1. कारगिल युद्ध दुनिया के सबसे ऊंचे क्षेत्रों में लड़े गए युद्धों में से एक है. कारगिल युद्ध को ऑपरेशन विजय नाम दिया गया था और इस युद्ध की जिम्मेवारी करीब 2 लाख सैनिकों को सौंपी गई थी. युद्ध के वक्त मुख्य युद्ध क्षेत्र कारगिल-द्रास सेक्टर में लगभग 30 हजार सैनिक तैनात थे.

2. भारतीय सैनिकों ने जिन घुसपैठियों को मारा था उनकी तलाशी के दौरान उनके पास से पाकिस्तानी परिचय पत्र मिले थे. इस युद्ध के पाक की तरफ से मारे गए अधिकतर जवान नॉर्दन लाइट इंफ्रैंट्री के थे. पहले यह एक अर्धसैनिक बल था लेकिन साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध में इसे पाकिस्तान की नियमित रेजीमेंट में परिवर्तित कर दिया गया.

कारगिल युद्ध में भारतीय वायु सेना ने मिग-27 और मिग-29 का इस्तेमाल किया था. लड़ाकू विमान मिग-27 की मदद से पाक सैनिकों द्वारा कब्जा किए गए स्थानों में बम गिराए गए थे. वहीं मिग-29 ने इस युद्ध में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा किया था. इसकी सहायता से कई ठिकानों पर आर-77 मिसाइलें दागी गई थी.

3. कारगिल युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली ऐसी लड़ाई मानी जाती है, जिसमें किसी एक देश ने दुश्मन देश की सेना पर इतनी ज्यादा बमबारी की हो. युद्ध में पाक के 357 सैनिकों की मौत हुई थी. जबकि अपुष्ट आंकड़ों के अनुसार भारतीय सेना ने 3 हजार से ज्यादा पाक सैनिकों को मार गिराया था. इंडियन आर्मी ने मुजाहिदीनों के रूप में पहाड़ियों पर कब्जा जमाए आतंकियों को हरा दिया था.

रोजाना औसतन एक मिनट में एक राउंड फायर

4. युद्ध में तोपखाने से 2 लाख 50 हजार गोले और रॉकेट दागे गए थे. 300 से ज्यादा तोपों, मोर्टार व रॉकेट लॉन्चर्स से रोज करीब 5 हजार गोले दागे गए थे. युद्ध के महत्वपूर्ण 17 दिनों में हर आर्टिलरी बैटरी से रोजाना औसतन एक मिनट में एक राउंड फायर होता था.

5. कारगिल में युद्ध शुरू होने से कुछ दिनों पहले जनरल परवेज मुशर्रफ ने एक हेलीकॉप्टर से नियंत्रण रेखा पार किया था. उन्होंने भारतीय भूभाग में करीब 11 किमी अंदर प्रवेश कर एक स्थान पर रात बिताई थी. साथ में  80 ब्रिगेड के तत्कालीन कमांडर ब्रिगेडियर मसूद असलम भी मौजूद थे. एक रिपोर्ट में बताया गया था कि दोनों ने जिकरिया मुस्तकार नामक स्थान पर रात बिताया था.

पाक के लिए आपदा साबित हुआ कारगिल युद्ध

6. साल 1998 में पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों का परीक्षण किया था. कारगिल की लड़ाई उम्मीद से ज्यादा खतरनाक थी. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुशर्रफ ने परमाणु हथियार तक इस्तेमाल करने की प्लानिंग कर चुका था. पाक सैनिक कारगिल युद्ध को साल 1998 में ही अंजाम देने वाला था. इसके लिए पाकिस्तान ने अपने 5 हजार जवानों को कारगिल पर चढ़ाई के लिए भेज दिया था.  

7. पाक के उर्दू डेली मेल में छपे एक रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने स्वीकार किया था कि कारगिल युद्ध पाक के लिए एक आपदा साबित हुआ. उन्होंने कहा था कि युद्ध में 2700 से ज्यादा सैनिकों की मौत हुई थी. पाकिस्तानी कब्जे वाले अंचलों में लगभग 30 हजार लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था. इसका असर भारतीय इलाकों के करीब 20 हजार लोगों पर भी पड़ा था.

पाकिस्तानी एयरफोर्स ने लड़ने से मना किया

8. इस युद्ध के दौरान पाकिस्तानी एयरफोर्स के चीफ को पहले से ही इस ऑपरेशन के बारे में जानकारी नहीं थी. पाकिस्तानी एयरफोर्स के चीफ को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने इस मिशन में आर्मी का साथ देने से इंकार कर दिया था.

9. कारगिल युद्ध 8 मई को शुरू हुआ था. युद्ध शुरू होने के बाद 11 मई से भारतीय वायुसेना की टुकड़ी ने भारतीय सेना की मदद करनी शुरू कर दी थी. इस युद्ध में एयरफोर्स के करीब 300 विमान उड़ान भरते थे.

10. कारगिल की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 16 हजार से 18 हजार फीट उपर है. इसलिए विमानों को लगभग 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरना पड़ता था. इतनी ऊंचाई पर हवा का घनत्व 30 फीसदी से कम रहता है. ऐसी परिस्थिति में विमान के अंदर ही पायलट के दम घुटने की संभावना रहती है.

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