Home Health Care KIDNEY INFECTION: बच्चों की किडनी में क्यों होता है इंफेक्शन!

KIDNEY INFECTION: बच्चों की किडनी में क्यों होता है इंफेक्शन!

बच्चों में किडनी की बीमारी वंशानुगत भी होती है तो तभी-कभी लापरवाही की वजह से भी. समय रहते अगर इसका पता चल जाए तो इलाज संभव है अन्यथा मरीज के जान पर भी बन आती है. Kidney Infection

आमतौर पर माना जाता है कि किडनी से संबंधित बीमारी सिर्फ बड़ों में ही होती है लेकिन सच तो ये है कि बच्चे भी इस बीमारी से अछूते नहीं हैं. बच्चों में कुछ मामलों में यह रोग अनुवांशिक रूप में पाया जाता है. इसके कई कारण हो सकते है!

कुछ बच्चों में तो गर्भावस्था में ही किडनी की बीमारी (Kidney Infection in Child) पाई जाती है. मां की सोनोग्राफी के दौरान ही बच्चे की किडनी में सूजन की जानकारी हो जाती है. गर्भस्थ शिशु में अगर यह बीमारी होती है तो इसका कारण मां के पेट में पानी की कमी हो सकती है.

किडनी में सूजन (Kidney Infection in Child) यानी पेशाब नली में रूकावट हो सकती है. अगर बच्चों में यूटीआई (यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) का इंफेक्शन है तो फिर उन्हें किडनी के इंफेक्शन का भी खतरा रहता है. मूत्राशय का सीधा संबंध किडनी से होने की वजह से इसके संक्रमित होते ही बैक्टीरिया तुरंत ही किडनी तक पहुंच जाते हैं. यह इंफेक्शन किडनी को काफी नुकसान पहुंचाता है.

अगर परिवार में किसी को पहले से किडनी की समस्या रहती है तो बच्चे में भी इसके होने की संभावना रहती है. समझदारी इसी में है कि अगर गर्भस्थ शिशु की किडनी में किसी तरह की दिक्कत देखी जाए तो उसके जन्म लेते ही तुरंत सोनोग्राफी करवाना सही होता है.

बच्चों की किडनी में संक्रमण का कारण –

1. किडनी में पथरी की समस्या – Kidney Infection in Child

बड़ों की ही तरह बच्चों में भी पथरी की समस्या देखी जाती है. इसके कई सारे कारण हैं जैसे किडनी की बनावट में दोष पेशाब में कैल्शियम या फिर अन्य पदार्थों का जाना, पानी कम पीना, काफी देर तक मूत्र त्याग नहीं करना व परिवार में अनुवांशिकी आदि है.

यह बीमारी ज्यादातर उन बच्चों में देखी जाती है जो स्कूल में लंबे समय तक टॉयलेट नहीं जाते. इस बीमारी के सामान्य लक्षणों में पेट में दर्द, पेशाब में खून आना व बुखार भी शामिल है.

अगर समय रहते इस मामले में सावधानी बरती जाए तो काफी हद तक इसे नियंत्रित किया जा सकता है. इसके लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीना व हर 2-3 घंटे पर टॉयलेट जाना जरूरी है.

2. कम पानी पीना भी किडनी को करता है संक्रमित – Kidney Infection in Child

शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा का रहना बहुत जरूरी है. पानी की कमी के कारण भी किडनी के प्रभावित (Kidney Infection in Child) होने की संभावना रहती है. डायरिया के समय दस्त व उल्टी होने की वजह से भी शरीर में पानी की कमी हो जाती है.

शरीर में पानी की मात्रा कम होने पर किडनी में रक्त सप्लाई कम होने (Kidney Infection in Child) से भी कई समस्याएं खड़ी हो जाती है. इसलिए ध्यान रखें कि उल्टी व दस्त के दौरान जब बच्चे की पेशाब की मात्रा कम हो जाए तो जांच जरूर करवाएं. समय रहते इलाज कराने से बीमारी के गंभीर होने की संभावना कम रहती है.

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3. बाथरूम की सफाई का रखें ध्यान – Kidney Infection in Child

छोटे बच्चों की किडनी में संक्रमण (Kidney Infection in Child) की एक मुख्य वजह शौचालय (टॉयलेट) में गंदगी का रहना. यानी साफ-सफाई में कमी है. टॉयलेट गंदा रहने से भी वह बच्चे के शरीर को संक्रमित करता है. इसलिए टॉयलेट को इंफेक्शन से बचाने के लिए हर सप्ताह जर्म किलर लिक्विड से अच्छे से साफ करें. ताकि आपका बच्चा स्वस्थ रहे.

4. मां के गर्भ में भी होता है संक्रमण – Kidney Infection in Child

गर्भावस्था के दौरान जो महिलाएं डायबिटीज से पीड़ित होती हैं, उनके बच्चे में कई तरह के संक्रमण का खतरा रहता है. इन संक्रमण में किडनी का इंफेक्शन (Kidney Infection in Child) भी शामिल है. गर्भवती महिला को 16वें सप्ताह में डायबिटीज की जांच करवानी चाहिए. इससे शिशु में होने वाले संक्रमण से समय रहते बचाया जा सके.

किडनी इंफेक्शन का पता लगाने के लिए जानें लक्षण व बचाव –

किडनी में किसी प्रकार की समस्या होने पर शरीर के अन्य अंगों से इसके लक्षण प्रकट होने लगते हैं. चेहरे या शरीर में सूजन, वजन नहीं बढ़ना, शरीर में सुस्ती, पेशाब की मात्रा में कमी या खून आना व उल्टी भी इसके लक्षणों में शामिल हैं. लेकिन ये तमाम लक्षण अन्य बीमारियों के भी हो सकते हैं इसलिए किडनी की समस्या जल्दी पकड़ में नहीं आती.

1. नेफरॉटिक सिंड्रोम – Kidney Infection in Child

इस सिंड्रोम के लक्षण 2 से 8 वर्ष की उम्र के कुछ बच्चों में देखे गए हैं. इस सिंड्रोम में बच्चे की किडनी में प्रोटींस लीक होने लगता है. जिसकी वजह से शरीर में सूजन, पेशाब कम होना समेत ब्लड प्रेशर की भी समस्या हो सकती है.

किडनी की बीमारी का मुख्य खतरा इंफेक्शन व सूजन से होती है. इलाज की बात करें तो यह इलाज काफी आसान है पर लंबा चलता है. लेकिन इस बीमारी के प्रति अगर आप समय रहते सचेत नहीं होते हैं तो फिर यह खतरनाक साबित होता है.

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2. मूत्र मार्ग में इंफेक्शन की समस्या Kidney Infection in Child

बच्चों में अक्सर ही मूत्र मार्ग में इंफेक्शन की समस्या देखा जाती है. इस बीमारी में बच्चे को लगातार बुखार की समस्या रहती है. टॉयलेट जाने के वक्त सूजन की वजह से बच्चा रोता है. सामान्यतः इसे बुखार या सर्दी-जुकाम के लक्षण समझकर लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं.

जबकि इसमें किडनी के क्षतिग्रस्त होने की संभावना रहती है. इलाज में देरी होने पर किडनी में मवाद बन सकती है. इसके बाद तो मरीज की जान जोखिम में पड़ सकती है. इसलिए स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतते हुए अगर बच्चे के पेशाब में जलन या तेज बुखार की समस्या रहे तो तुरंत इलाज शुरू कर दें. सोनोग्राफी जरूर करवाएं ताकि बच्चे की जान बचाई जा सके.

3. रोजाना बिस्तर पर पेशाब करने की आदत Kidney Infection in Child

छोटे बच्चों में बिस्तर पर पेशाब करना तो आम समस्या है. किसी बच्चे में तो यह छोटी उम्र की समस्या है लेकिन कई बार 15 वर्ष की आयु के बच्चों में भी यह समस्या देखी जाती है. यह समस्या में किडनी में खराबी की वजह से भी हो सकती है. इसलिए अगर बच्चे में छोटी उम्र से ही बिस्तर पर पेशाब करने की समस्या दिखे तो तुरंत चिकित्सक को दिखाकर उसका इलाज शुरू करवाएं.

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ऐसे करें उपचार –

बच्चों में किडनी की समस्या का पता लगाने के लिए तीन मुख्य जांच करवाना जरूरी होता है. जैसे सोनोग्राफी, खून में क्रिएटिनिन व पेशाब की जांच. कुछ बच्चों में एमसीयू व किडनी की बायप्सी भी करवानी होती है. इस तरह की जांच के लिए बाल किडनी रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना सही रहता है.

समय रहते अगर कोई बीमारी पकड़ में आ जाती है तो उसका इलाज भी संभव होता है. लेकिन अगर इलाज में ज्यादा देरी होने से किडनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती है तो व्यक्ति को बचाना असंभव हो जाता है.

क्योंकि किडनी के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर प्रत्यारोपण ही एकमात्र इलाज रह जाता है. अब संकट यहां भी है कि अगर दूसरी किडनी उपलब्ध नहीं होती है तो फिर डायलिसिस ही अस्थाई उपचार के तौर पर शेष रह जाता है. #KidneyInfection

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