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Lemon For Babies In Hindi: शिशुओं को नींबू देना कब शुरू करें

नींबू कई बार बच्चे के पाचन तंत्र के लिए सख्त होते हैं. इसलिए बगैर परामर्श के बच्चे को नींबू देना सही नहीं है. Lemon For Babies in hindi

शिशु को जब ठोस आहार देना शुरू किया जाता है तो वह नए-नए स्वाद को आजमाने के लिए उत्सुक होता है. वैसे तो बच्चों को (Lemon For Babies In Hindi) दिए जाने वाले आहार पौष्टिक होते हैं लेकिन यह जरूरी नहीं है कि उन्हें दी जाने वाली सभी सब्जियां और फल उनके लिए सुरक्षित हों और बच्चे को उससे लाभ पहुंचे. यहां हम जानते हैं कि क्या नींबू देना शिशु के लिए हानिकारक है?

Lemon For Babies In Hindi

नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड नामक एक अम्ल कई बार बच्चे के पाचन तंत्र के लिए सख्त होते हैं. इसलिए बच्चे की उम्र कम से कम 10 महीना होने के बाद उसे नींबू देना उचित होता है. साथ में यह भी ध्यान रखना जरूरी होता है कि कहीं इससे बच्चे को कोई एलर्जी तो नहीं हो रही?

बच्चों के लिए नींबू के स्वास्थ्य लाभLemon For Babies In Hindi

बच्चों को नींबू का रस देने के कई सारे फायदें हैं जैसे-

1. हाईड्रेशन के लिए

गर्मियों के मौसम में बच्चे के आहार में नींबू शामिल करना बढ़िया रहता है. क्योंकि नींबू का रस शरीर को हाइड्रेट करने में मदद करता है और इसे आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करता है.

2. पाचन समस्याओं को करे दूर

नींबू के रस (Lemon For Babies In Hindi) में कृमिनाशक गुण होने के कारण यह पाचन तंत्र संबंधी कई सारी समस्याओं को दूर करने में मददगार साबित होता है. नींबू का रस आंतों में मौजूद कीड़ों को खत्म करने में मदद करते हैं. आपके बच्चे को अगर अपच, कब्ज और मतली जैसी बिमारियों की शिकायत है, तो उन्हें आप नींबू का रस दे सकते हैं.

3. उल्टी करे नियंत्रित

उल्टी की समस्या आमतौर पर लंबे समय से अपच की परेशानी गैस्ट्रिक रिफ्लक्स और तंत्रिका संबंधी विकारों के कारण होती है. अगर आप आधा चम्मच नींबू के रस में आधा चम्मच शहद मिलाकर बच्चे को देते हैं तो इससे सकी उल्टी की समस्या तुरंत ही ठीक हो जाएगी. एक बात याद रखें कि 1 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बच्चे को ही शहद दें.

4. स्कर्वी रोग से बचाए

यह रोग आहार में एस्कॉर्बिक एसिड की भारी कमी के कारण होता है. यह एक किस्म का त्वचा और मौखिक बीमारी है. अपने बच्चे को स्कर्वी रोग के बचाने के लिए आप उसे एक गिलास पानी में चीनी और दो बड़े चम्मच नींबू का रस (Lemon For Babies In Hindi) मिलाकर दें.

5. टॉन्सिल्स के इलाज में करे मदद

एक ग्लास गुनगुने पानी में थोड़ा सा शहद और 1 से 2 चम्मच नींबू का रस डालकर बच्चे को देने से टॉन्सिल्स के इलाज में सहायता मिलती है.

6. दस्त को करे नियंत्रित

छोटे बच्चों में दस्त एक आम समस्या है और इससे राहत दिलाने के लिए सबसे पहले बच्चे के शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखना जरूरी है. इसके लिए आप अपने बच्चे को एक ग्लास पानी में एक बड़ा चम्मच नींबू का रस, नमक और चीनी मिलाकर दे सकते हैं.

7. सर्दी-जुकाम से बचाए

शहद और नींबू को मिलाकर देने से यह सर्दी-जुकाम को दूर करने में काफी हद तक मदद करता है.

8. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए

शिशुओं की प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह से विकसित नहीं होने के कारण वे बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं. नियमित रूप से नींबू के रस (Lemon For Babies In Hindi) का सेवन करने से यह बच्चों को बीमार होने से बचाता है.  नींबू में मौजूद विटामिन ‘सी’ उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करती है.

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छोटे बच्चों को नींबू का रस देने की विधिLemon For Babies In Hindi

1. गर्मियों के मौसम में बच्चों को ताजे नींबू का रस देना उनकी सेहत के लिए लाभदायक होता है. इसके लिए आप पहले आधा ग्लास पानी लें और उसमें एक छोटा नींबू का रस निचोड़ लें. अब इसमें एक चम्मच चीनी  और एक चुटकी नमक डाल कर मिला लें और बच्चे को पिलाएं. आप चाहें तो चीनी को अपने हिसाब से ज्यादा या कम कर सकते हैं.

2. अगर आप बच्चे को नींबू का रस देने जा रहे हैं तो पहले इसकी शुरुआत कम मात्रा से करें और रस को पानी के साथ मिलाकर दें.

3. आपका बच्चा अगर एक वर्ष से कम उम्र का है, तो उसे नींबू का रस कभी–कभार ही दिया जाना चाहिए.

शिशुओं को नींबू का रस देने से पहले इन बातों का रखें ध्यान-

सही उम्र

आपका बच्चा जब लगभग 10 महीने या फिर 1 वर्ष का हो जाए तो आप उसे पानी में नींबू का रस मिलाकर देना शुरू कर सकते हैं. इस रस में आप थोड़ी सी चीनी मिला लें ताकि यह बहुत खट्टा न लगे. ध्यान रहे कि बच्चे को नींबू के टुकड़े नहीं देना चाहिए भले ही वह एक वर्ष से अधिक का ही क्यों न हों. क्योंकि नींबू में मौजूद एस्कॉर्बिक एसिड के कारण दाँतों का इनेमल खराब होता है, जिससे दांतों की संवेदनशीलता बढ़ने की संभावना रहती है.  

साइट्रल एलर्जीLemon For Babies In Hindi

परिवार में अगर साइट्रस एलर्जी होने का इतिहास रहा है, तो बच्चे को कम से कम 1 वर्ष का होने तक नींबू देने से बचें. नींबू का रस पिलाने से अगर बच्चे के होंठ और मुँह के आसपास रैशेजआ गए हों या डायपर रैशेज पड़ गए हों, तो उसे तुरंत ही डॉक्टर के पास ले जाएं.

शिशु के लिए बाजार से आहार संबंधी कोई भी सामान खरीदते वक्त उस पर लगे लेबल की हमेशा जांच करें. जैसे–जैसे शिशु बड़ा होगा,  हो सकता है वो खट्टे फलों को खाने लगे लेकिन फिलहाल उन्हें खट्टे फलों से दूर ही रखें. हालांकि अपने बच्चे को नींबू का रस देने की शुरुआत करने से पहले अपने बाल रोग विशेषज्ञ से एक बार जरूर परामर्श कर लें.

संभावना रहती है कि जब आप अपने बच्चे को नींबू दें तो वो इसका सेवन करने से इंकार कर दे. बच्चे को किसी भी नए भोजन को देने की शुरुआत से पहले उसे एक चम्मच देने से शुरुआत करें, ताकि यदि बच्चे को किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी हो तो आप इसे आसानी से पहचान सकें. जिन बच्चों के दाँत निकल रहे हों उन्हें नींबू के रस की बहुत कम मात्रा वो भी पानी में मिलाकर ही देना चाहिए.

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