Home Education Nature Conservation: मुश्किल में प्रकृति बचाने की मुहिम!

Nature Conservation: मुश्किल में प्रकृति बचाने की मुहिम!

पर्यावरण ही वह आधार है, जिस पर स्वच्छ व स्वस्थ जीवन आश्रित है. इसलिए पर्यावरण संरक्षण में हर व्यक्ति की भूमिका अनिवार्य है. Nature Conservation Awareness

पर्यावरण को स्वच्छ व सुरक्षित रखने (Nature Conservation Awareness) की जिम्मेवारी हमलोगों की ही है. पर्यावरण के प्रति जागरूक होना हमारे साथ-साथ हमारी भावी पीढ़ियों को भी सुरक्षित करेगी. प्रति वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर प्रशासन से लेकर आम लोगों तक का ध्यान आकर्षित किया जाता है.

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विभिन्न तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण रक्षा व पौधारोपण का संकल्प लिया जाता है. बावजूद इसके अगले ही दिन लोग इसे भूल जाते हैं. यानी बहुत कम लोग ही पर्यावरण जैसे विषय को गंभीरता से लेते हैं. अगर हम जिला स्तर की बात करें तो यहां आज भी काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें ग्लोबल वार्मिंग की जानकारी नहीं है.

दिन-प्रतिदिन अत्याधुनिक संसाधनों के बढ़ते प्रयोग व लगातार हो रही पेड़ों की कटाई से पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. किसी एक व्यक्ति से नहीं बल्कि पर्यावरण को बचाने के लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा. अन्यथा भविष्य में स्थितियां और खराब होगी और धरती पर जीवन मुश्किल हो जाएगा.

पर्यावरण को सुरक्षित (Nature Conservation Awareness) रखने के लिए हमें सबसे पहले अपनी मुख्य जरूरत यानी जल को प्रदूषण मुक्त करना होगा. जल प्रदूषण के साथ ही वायु प्रदूषण भी मानव के सम्मुख एक चुनौती है. सही मायनों में पर्यावरण पर हमारा भविष्य आधारित है.

अगली पीढ़ी को करें जागरूक – Nature Conservation Awareness

कहने का तात्पर्य है कि यदि हम अपने कल को स्वस्थ देखना चाहते हैं तो जरूरी है कि अपने बच्चों को पर्यावरण सुरक्षा का समुचित ज्ञान समय-समय पर देते रहें. ताकि आने वाली पीढ़ी को हम सुरक्षित रख सकें. पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विभिन्न स्वयं सेवी संगठनें कार्य कर रही हैं. वातावरण को स्वच्छ व सुरक्षित रखने की मुहिम लगातार जारी है.

लेकिन कई संगठन ऐसे हैं जिन्हें इस नेक कार्य में विभिन्न तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है. उन्हें सही समर्थन नहीं मिलता. फिर भी पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षित (Nature Conservation Awareness) रखने के लिए ये संस्थाएं कार्य कर रही हैं. यह कहना है ‘सरस्वती नदी बचाव कमेटी’ के जनरल सेक्रेटरी बापी ठाकुर का.

जो ‘सरस्वती नदी बचाव कमेटी’के बैनर तले वे पिछले 20 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई लड़ रहे हैं. उनसे हुई खास बातचीत में उन्होंने बताया कि ‘सरस्वती नदी बचाव कमेटी’ व ‘संप्रीति’ इन दोनों संगठनों के संयुक्त सहयोग से वर्ष 1998 से ही पर्यावरण संरक्षण अभियान जारी है.

इस कड़ी में संगठन की तरफ से स्कूलों में समय-समय पर सेमिनार का आयोजन किया जाता है. साथ ही लोगों में प्रचार पत्र वितरण कर भी उन्हें जागरूक किया जा रहा है.

प्रति वर्ष 1000 वृक्षारोपण – Nature Conservation Awareness

गांव-गांव में सालाना करीब 1000 वृक्षारोपण किया जाता है. हरियाली बचाने की मुहिम (Nature Conservation Awareness) में विभिन्न क्लब व संगठन को भी एकजुट किया जाता है. पूरे पृथ्वी की सबसे बड़ी समस्या ग्लोबलाइजेशन है और परिवेश को सुरक्षित रखना हम सबकी नैतिक जिम्मेवारी है.

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इन दिनों सरकारी तौर पर भी पॉलीथीन को लेकर लोगों को जागरूक (Nature Conservation Awareness) किया जा रहा है. हमारा संगठन भी दुकानदारों के साथ-साथ ग्राहकों को भी जागरूक कर रहे हैं. इस मुहिम का रिजल्ट भी सकारात्मक मिल रहा है. जहां तक जलाशय भरे जाने की समस्या है तो इसके लिए भी लगातार आंदोलन जारी है.

लेकिन जिस स्तर से आंदोलन जारी है वैसा परिणाम देखने को नहीं मिल रहा. सबसे बड़ी समस्या है कि यहां प्रशासनिक तौर पर इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा. सरकारी तौर पर बात करें या राजनीतिक लीडर्स की, तो सभी इसको लेकर लापरवाह हैं.

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राजनीतिक व्यक्तित्व अपने फायदे के लिए जलाशय भरने वालों का समर्थन करते हैं. यही वजह है कि आंदोलन को सही दिशा नहीं मिल पाती. अपने उद्देश्य पूर्ति के लिए जलाशय को भरना बहुत बड़ी समस्या है. जो जलाशय बचे हुए हैं उनकी स्थिति भी दयनीय बनी हुई है.

दूषित जलाशय से मछली पालन प्रभावित – Nature Conservation Awareness

दूषित परिवेश इन जलाशयों को भी दूषित करती है. पानी के विषाक्त होने की वजह से मछली पालन पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है. जलाशय संबंधी इन तमाम समस्याओं की लिखित शिकायत प्रशासन से की गई है. लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं मिला.

सिंचाई मंत्री, डीएम, हावड़ा डीएम, वीडियो डोमजुर व बीएल एंड एलआरओ से इसकी लिखित शिकायत की गई है. लेकिन कहीं से इसका उत्तर नहीं दिया जा रहा. इनका सीधे तौर पर कहना है कि जब तक प्रशासन इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं होता है.

तब तक समस्याएं यूं ही बनीं रहेंगी. यानी लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण के लिए प्रशासन को सख्त होना भी जरूरी है. अन्यथा सुविधाभोगी अपने उद्देश्य पूर्ति के लिए प्रकृति का दुरूपयोग करते रहेंगे. जिसका बुरा परिणाम सभी को भुगतना पड़ेगा.

‘अपने लिए, परिजनों के लिए व पड़ोसियों के लिए परिवेश को सुरक्षित रखें. इस कार्य को हाथ में हाथ मिलाकर करना होगा. अन्यथा हम सबका बचना मुश्किल है यानी की स्वस्थ परिवेश नहीं होने पर जीवन असंभव है. क्योंकि सुरक्षित पर्यावरण ही आपको सुरक्षा दे पाएंगे. इसलिए समय रहते हर किसी को सचेत होना जरूरी है.’ #NatureConservation

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