Home Education नेताजी की ये बातें आज कितनी प्रासंगिक हैं!

नेताजी की ये बातें आज कितनी प्रासंगिक हैं!

आजादी की लड़ाई के दौरान जब नेताजी ने 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा' का नारा बुलंद किया था तो उनके इस विचार ने देश के क्रांतिकारियों में गजब का जोश भर दिया था.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhas Chandra Bose) जो कि स्वाधीनता संग्राम के अग्रणी नेता थे और उन्होंने ही ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा’ का नारा बुलंद किया था. उनके ये नारे आज भी युवाओं के रगों में जोश भर देते हैं. आजाद हिंद फौज के संस्थापक और अंग्रेजों से देश को मुक्त कराने में अपनी अहम भूमिका अदा करने वाले नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था.

अंग्रेजों के खिलाफ अपनी लड़ाई शुरू करने के लिए उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया था. आजादी की लड़ाई के दौरान जब नेताजी ने ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा’ का नारा बुलंद किया था तो उनके इस विचार ने देश के क्रांतिकारियों में गजब का जोश भर दिया था और यह सिर्फ तब की बात नहीं है बल्कि उनके विचार आज भी युवाओं में जोश प्रवाहित करते है.

तो इसलिए खास हैं नेताजी…

Subhas Chandra Bose
Subhas Chandra Bose

1. ‘दिल्ली चलो’ का नारा:

5 जुलाई 1943 को सिंगापुर स्थित टाउन हॉल के समीप नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ‘सुप्रीम कमाण्डर’ के रूप में अपनी सेना को संबोधित करते हुए ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया था.

2. 21 अक्टूबर 1943 का महत्व:

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति के रूप में स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार का गठन किया था.

3. आजाद हिन्द फौज:

आजाद हिन्द फौज ने वर्ष 1944 को अंग्रेजों पर आक्रमण कर कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी कराया था.

4. कोहिमा का युद्ध:

4 अप्रैल 1944 से 22 जून 1944 तक आजादी के लिए लड़ा गया कोहिमा का युद्ध एक भयानक और बहुत ही लंबा चलने वाला युद्ध था.

5. बापू से मांगा था समर्थन:

नेताजी ने 6 जुलाई 1944 में रंगून रेडियो स्टेशन से महात्मा गांधी के नाम एक प्रसारण जारी करके उनसे आशीर्वाद और शुभकामनायें मांगी थी.

6. नेताजी की मृत्यु पर आज भी सस्पेंस:

नेताजी के परिवार के सदस्यों का आज भी यह मानना है कि उनकी मौत 1945 में नहीं हुई थी.

7. क्यों खास है कटक शहर!

ओडिशा के कटक शहर में ही 23 जनवरी 1897 को नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म हुआ था. उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था. उनके पिता मशहूर वकील थे और अंग्रेज सरकार से उन्हें रायबहादुर का खिताब भी मिला था.

8. आईएएस बनाना चाहते थे पिता:

नेताजी (Subhas Chandra Bose) के पिता ने आईएएस बनाने के लिए ही उन्हें विदेश भेजा था. वर्ष 1920 में नेताजी ने आईएस की वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त करते हुए पास कर लिया था.

9. नौकरी त्यागी:

नेताजी को अंग्रेजों की गुलामी करना पसंद नहीं था इसलिए उन्होंने 22 अप्रैल 1921 को भारत सचिव ई.एस. मान्टेग्यू को आईसीएस से त्यागपत्र देने का पत्र लिखा था.

10. स्वदेश वापस लौटे:

सुभाष चंद्र बोस (Subhas Chandra Bose) ने जून 1921 में मनोविज्ञान एवं नैतिक विज्ञान में ट्राइपास (ऑनर्स) की डिग्री लेकर स्वदेश लौट आये थे.

11. इंडिपेंडेंस लीग:

इंडिपेंडेंस लीग की शुरुआत सुभाष चंद्र बोस ने जवाहरलाल नेहरू के साथ मिलकर की थी.

12. साइमन कमीशन का विरोध:

साइमन कमीशन जब वर्ष 1928 में भारत आया था तब कांग्रेस की तरफ से उसे काले झण्डे दिखाये गये थे. कोलकाता में इस आंदोलन का नेतृत्व नेताजी ने ही किया था.

13. लाठी चार्ज कर भेजे गए जेल:

कोलकाता में 26 जनवरी 1931 को जब नेताजी राष्ट्र ध्वज फहराकर एक विशाल मार्च का नेतृत्व कर रहे थे, उसी समय उन पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज कर उन्हें घायल किया गया और फिर जेल भेज दिया गया था.

14. भेजे गए म्यांमार:

नेताजी के बारे में अंग्रेंजो को शक था कि वे ज्वलंत क्रांतिकारियों से संबंध रखते हैं. यही वजह है कि अंग्रेजों ने उन्हें म्यांमार के माण्डले कारागृह में अनिश्चित काल के लिये बन्दी बनाकर भेज दिया था.

15. मौत पर विवाद कायम:

माना जाता है कि 18 अगस्त 1945 में ताइवान में एक विमान दुर्घटना में नेताजी की मौत हो गई थी. पर आज तक उनका शव नहीं मिलने की वजह से उनकी मौत पर विवाद बरकरार है.

"तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा" – सुभाष चंद्र बोस Click To Tweet

नेताजी के 10 प्रेरणादायी विचार:

Netaji
Netaji

1. तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा.

2. याद रखें अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना सबसे बड़ा अपराध है.

3. यह सभी का कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं. अपने बलिदान और परिश्रम से मिली आज़ादी को हमारे अंदर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए.

4. एक सैनिक के तौर पर आपको हमेशा तीन आदर्शों को संजोए रखना और उन पर जीना होगा: सच्चाई, कर्तव्य और बलिदान. वो सिपाही अजेय है जो हमेशा अपने देश के प्रति वफादार रहता है और हमेशा अपना जीवन बलिदान करने को तैयार रहता है. अगर आप भी अजेय बनना चाहते हैं तो इन तीन आदर्शों को अपने हृदय में भी बनाए रखें.

5. हमेशा असफलता के स्तंभ पर सफलता खड़ी होती है.

6. मेरा अनुभव कहता है कि आशा की कोई न कोई किरण हमेशा आती है, जो हमें जीवन से दूर भटकने नहीं देती.

7. जिस व्यक्ति के अंदर ‘सनक’ नहीं होती वो कभी महान नहीं बन सकता लेकिन उसके अंदर, इसके आलावा भी कुछ और होना चाहिए.

8. जो अपनी ताकत पर भरोसा करते हैं, वो आगे बढ़ते हैं और उधार की ताकत वाले घायल हो जाते हैं.

9. हमारा सफर कितना ही भयानक, कष्टदायी और बदतर हो, लेकिन हमें आगे बढ़ते रहना ही है. सफलता का दिन दूर हो सकता हैं, लेकिन उसका आना अनिवार्य है.

10. मां का प्यार सबसे गहरा होता है-स्वार्थरहित. इसको किसी भी तरह से मापना असंभव है.

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