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Night Terror in Kids: क्या आपका बच्चा भी नींद में रोता या कांपता है, तो नाइट टेरर हो सकती है इसकी वजह

बच्चों में नाइट टेरर एक आम समस्या है लेकिन कई बार यह बुरे सपनों से भी अधिक डरावना साबित हो सकता है. (Night Terror in Kids)

कोई भी माता-पिता अपने बच्चे को दुनियाभर की तमाम मुश्किलों से सुरक्षित रख सकते हैं. लेकिन बात जब डरावटे सपनों (Night Terror in Kids) की हो तो वहां माता-पिता का भी कोई बस नहीं चलता. बच्चे जब बुरे सपने देखकर अचानक चीखते हुए नींद से उठकर बैठ जाते हैं तो माता-पिता परेशान हो जाते हैं. ऐसी ही एक समस्या नाइट टेरर  है, जो कि बुरे सपनों तक सीमित नहीं है.

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आमतौर पर जब बच्चे बुरे सपने देख कर जाग जाते हैं तो आप उसे थोड़ी देर में शांत करके सुला भी सकते हैं. लेकिन नाइट टेरर तो बुरे सपनों से भी ज्यादा डरावना होता है. नाइट टेरर स्लीप टेरर नाम से भी जाना जाता है. इसका अनुभव बच्चे को सोने के 2-3 घंटों में ही हो जाता है. यह समस्या ज्यादातर 3-12 वर्ष के बच्चों में होती है. जिसमें बच्चे  नाइट टेरर की वजह से रोते हुए, कांपते हुए और चीखते-चिल्लाते हुए जग जाते हैं.

आपके बच्चे में भी अगर नाइट टेरर (Night Terror in Kids) की समस्या है तो उसकी हार्ट बीट बढ़ सकती है. इसके अलावा वह तेज सांसें ले सकता है, बहुत अधिक पसीना बह सकता है और आंखों की पुतलियां भी उलट-पलट सकती हैं. वैसे तो यह समस्या कुछ ही मिनटों तक रहती है लेकिन इस नाइट टेरर वजह से जगने के बाद बच्चे को करीब आधे घंटे तक सोने में परेशानी हो सकती है. राहत की बात ये है कि यह समस्या बच्चे के लिए खतरनाक नहीं होती. इसकी वजह है कि जगने के बाद बच्चे को इसके बारे में कुछ भी याद नहीं रहता. हालांकि बार-बार की इस समस्या से बच्चे के साथ-साथ माता-पिता की भी नींद पूरी नहीं होती.  

नाइट टेरर का कारण क्या है? Night Terror in Kids

नाइट टेरर (Night Terror in Kids) की एक प्रमुख वजह अनुवांशिक कारण भी हो सकते हैं. इसीलिए हो सकता है कि आपके बच्चे को यह समस्या आपके परिवार के ही किसी सदस्य से मिली हो. इसके अलावा बेचैनी, तनाव, बुखार, एंग्जायटी, कैफीन का अधिक सेवन, नींद की कमी, दिनचर्या में बदलाव व कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स के कारण भी ऐसा होने की संभावना रहती है.

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नाइट टेरर की परेशानी में ऐसे करें मदद Night Terror in Kids

इस समस्या का कोई इलाज नहीं है. बच्चे की उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह समस्या धीरे-धीरे कम हो सकती है. आपका बच्चा जब नाइट टेरर की परेशानी महसूस करे तो, ध्यान रहे कि उसे नींद से ना उठाएं. विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे में बच्चे के पास लेट जाएं और उन्हें सोने में मदद करें.

1. बच्चे को नाइट टेरर से बचाने के उपाय

2. आप बच्चे में हमेशा एक ही समय पर सोने-जागने की आदत डालें. उसे देर तक जागने से रोकें.

3. अगर आपको इसका अंदाजा लग जाए कि सोने के कितने समय बाद वह नाइट टेरर के बाउट को महसूस करता है. तो बच्चे को उस समय से ठीक पहले ही जगा दें. बच्चे को कम से कम 5 मिनट के लिए जगाकर रखें और उसे बिस्तर से बाहर ले जाएं.

4. नींद में बाधा देने वाली सभी चीजों को बच्चे के कमरे से दूर रखें. जैसे कम्प्यूटर, टीवी या शोर करने वाले खिलौने.

6. बच्चे में तनाव ना होने दें.

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