Home Education Panchatantra Moral Stories in Hindi: पंचतंत्र की प्रेरणादायी कहानियां

Panchatantra Moral Stories in Hindi: पंचतंत्र की प्रेरणादायी कहानियां

पंचतंत्र की कहानियां, जिसमें संस्कार, बेहतर सीख व जीवन में अच्छी चीजों की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है. (Panchatantra Moral Stories in Hindi)

छोटे बच्चों के मन में बातों को गहराई तक पहुंचाने का सबसे बेहतर तरीका कहानियां ही होती है. खासकर पंचतंत्र की कहानियां (Panchatantra Moral Stories in Hindi) जिसमें संस्कार, बेहतर सीख व जीवन में अच्छी चीजों की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है. पांच भागों में बंटी पंचतंत्र की कहानियां जो दोस्ती की अहमियत, नेतृत्व व व्यवहारिकता जैसी अहम बातों को सरल और आसान शब्दों में बच्चों तक पहुंचा कर उन पर गहरी छाप छोड़ती हैं.

Panchatantra Moral Stories in Hindi

शायद यही कारण है कि अक्सर बचपन में सुनी हुई कहानियां और उनकी सीख जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव पर मार्ग दर्शक के रूप में काम करती है. हम यहां पंचतंत्र की कुछ रोचक कहानियां लेकर आए हैं और इन कहानियों के माध्यम से आप बच्चों को खुशी देने और उनका मन बहलाने के साथ ही उनके अंदर नैतिकता व सदाचार के भाव को भी पहुंचा सकते हैं.

तो देर किस बात की आप बच्चों को ये शिक्षाप्रद कहानियां सुनाते हुए खुद भी अपने बचपन में खो जाइए- Panchatantra Moral Stories in Hindi

1. बोलने वाली गुफा

बहुत पहले की बात है, एक घने जंगल में बड़ा-सा शेर रहता था. उसके भय से जंगल के सभी जानवर कांपते थे. वह हर रोज जंगल के जानवरों का शिकार करके अपना पेट भरता था.

एक बार वह पूरे दिन जंगल में भटकता रहा लेकिन उसे एक भी शिकार नहीं मिला. भटकते-भटकते शाम हो गई और भूख से उसकी हालत भी बहुत खराब हो गई. तभी उसे एक गुफा दिखी. शेर ने सोचा कि क्यों नहीं इस गुफा में बैठकर इसके मालिक का इंतजार किया जाए और जैसे ही वो आएगा वैसे ही उसे मारकर वह अपनी भूख मिटा लेगा. यह सोचते ही शेर दौड़कर उस गुफा के अंदर जाकर बैठा.

वह गुफा एक सियार की थी, जो दोपहर में ही बाहर निकला था. जब वह रात को अपनी गुफा में लौटा तो उसने गुफा के बाहर शेर के पंजों के निशान देखे और यह देखकर वह सतर्क हो गया. उसने जब ध्यान से निशानों को देखा, तो उसे समझ आया कि पंजों के निशान सिर्फ गुफा के अंदर जाने के ही है लेकिन बाहर आने के नहीं है. अब उसे इस बात का भरोसा हो गया कि शेर गुफा के अंदर ही बैठा है.

कहानियां

फिर भी इसकी पुष्टि करने के लिए सियार ने एक तरकीब निकाली. उसने गुफा के बाहर से ही आवाज लगाई, “अरी ओ गुफा! क्या बात है, आज तुमने मुझे आवाज नहीं लगाई. रोज तुम पुकारकर मुझे बुलाती हो लेकिन आज बड़ी चुप हो. ऐसा क्या हो गया है?”

अंदर बैठे शेर ने सोचा कि “हो सकता है यह गुफा रोज इस सियार को आवाज लगाकर बुलाती हो लेकिन आज मेरी वजह से बोल नहीं रही है. कोई बात नहीं चलो आज मैं ही इसे पुकारता हूं.” यह सोचकर शेर ने जोर से आवाज लगाई, “आ जाओ मेरे प्रिय मित्र सियार. अंदर आ जाओ.”

इस आवाज को सुनते ही सियार को पता चल गया कि शेर अंदर बैठा है. वो तेजी से अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला.

कहानी से सीख :

मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी अगर बुद्धि से काम लिया जाए तो उसका हल अवश्य निकल सकता है.

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2. ब्राह्मण का सपनाPanchatantra Moral Stories in Hindi

एक समय की बात है, किसी शहर में एक कंजूस ब्राह्मण रहता था. एक दिन उसने भिक्षा में जो सत्तू मिला था उसमें से थोड़ा खाकर बाकी को उसने एक मटके में भरकर रख दिया. फिर उसने उस मटके को (Panchatantra Moral Stories in Hindi) खूंटी से टांग कर और पास में ही खाट डालकर सो गया. सोते-सोते वो सपनों की अनोखी दुनिया में खो गया. सपने में वो विचित्र कल्पनाएं करने लगा.

ब्राह्मण सोचने लगा कि जब शहर में अकाल पड़ेगा तो सत्तू का दाम 100 रुपये हो जाएगा और मैं इस सत्तू बेचकर बकरियां खरीद लूंगा. बाद में इन बकरियों को बेचकर गाय खरीद लूंगा. इसके बाद फिर भैंस और घोड़े भी खरीदूंगा.

कंजूस ब्राह्मण कल्पनाओं की विचित्र दुनिया में पूरी तरह खो गया. उसने सोचा कि घोड़ों को अच्छी कीमत पर बेचकर बहुत सारा सोना खरीद लूंगा. इसके बाद सोने को अच्छे दाम पर बेचकर बड़ा-सा घर बनाऊंगा. मेरी संपत्ति को देखकर कोई भी व्यक्ति अपनी बेटी की शादी मुझसे करा देगा. शादी के बाद मैं अपने बच्चे का नाम मंगल रखूंगा.

कहानियां

जब मेरा बच्चा अपने पैरों पर चलने लगेगा, तो मैं दूर से ही उसे खेलते हुए देखकर आनंद लूंगा. बच्चा जब मुझे परेशान करने लगेगा, तो मैं गुस्से में पत्नी को बोलूंगा और कहूंगा कि तुम बच्चे को ठीक से संभाल भी नहीं सकती. अगर वह घर के काम में व्यस्त होगी और मेरी बात का पालन नहीं करे, तब मैं गुस्से में उठकर उसके पास जाऊंगा और उसे पैर से ठोकर मारूंगा. ये सारी बातें सोचते हुए ब्राह्मण का पैर ऊपर उठता है और सत्तू से भरे मटके में ठोकर मार देता है, जिससे उसका मटका टूट जाता है.

इस तरह सत्तू से भरे मटके के साथ-साथ कंजूस ब्राह्मण का सपना भी चकनाचूर हो जाता है.

कहानी से सीख:

इस कहानी से यह सीख मिलती है कि किसी भी काम को करते वक्त मन में लोभ नहीं आना चाहिए. लोभ का फल मीठा नहीं होता है. साथ ही सिर्फ सपने देखने से सफलता नहीं मिलती बल्कि इसके लिए मेहनत भी करना होता है.

3. गौरैया और बंदर की कहानीPanchatantra Moral Stories in Hindi

बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल के किसी घने पेड़ पर एक गौरैया का जोड़ा रहता था. दोनों उस पेड़ पर अपना घोंसला बनाकर गुजर-बसर करते थे. दोनों ही खुशी-खुशी अपना जीवन बीता रहे थे. फिर सर्दियों का मौसम आया और इस बार बहुत ही कड़ाके की ठंड पड़ने लगी. ठंड से बचाव के लिए एक दिन कुछ बंदर उस पेड़ के नीचे ठिठुरते हुए पहुंचे. सभी बंदर तेज ठंडी हवाओं से कांप रहे थे और बहुत ही परेशान थे. पेड़ के नीचे बैठने के बाद वे आपस में बात करने लगे कि काश कहीं से आग सेंकने को मिल जाती तो ठंडक दूर हो जाती. उसी बीच एक बंदर की नजर पास पड़ी सूखी पत्तियों पर पड़ गई.

उसने दूसरे बंदरों से कहा कि “चलो इन सूखी पत्तियों को इकट्ठा करके और जलाते हैं.” उन बंदरों ने पत्तियों को एक जगह इकट्ठा किया और जलाने का उपाय करने लगे. पेड़ पर बैठी गौरैया यह सब देख रही थी. यह सब देख उससे रहा नहीं गया और वो बंदरों से बोल पड़ी, “तुम लोग कौन हो?, देखने में तो तुम आदमियों की तरह लग रहे हो, हाथ-पैर भी हैं, तुम अपना घर बनाकर क्यों नहीं रहते?”

कहानियां

गौरेया की बात सुनकर ठंड से कांप रहे बंदर चिढ़ गए और बोले, “तुम अपना काम करो, हमारे काम में पड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है.” इतना कहने के बाद वो फिर से आग जलाने के बारे में सोचने लगे और इसके लिए अलग-अलग तरीके अपनाने लगे. इतने में बंदरों की नजर एक जुगनू पर पड़ी. वो चिल्लाने लगा, “देखो ऊपर हवा में चिंगारी है, इसे पकड़कर आग जलाते हैं.” यह सुनते ही सारे बंदर उसे पकड़ने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने लगे. ये देख चिड़िया फिर बोल पड़ी, “यह जुगनू है, इससे आग नहीं सुलगेगी।” तुम लोग दो पत्थरों को घिसकर आग जला सकते हो.”

बंदरों ने चिड़िया की बात को अनसुना कर दिया. काफी कोशिश (Panchatantra Moral Stories in Hindi) के बाद उन्होंने जुगनू को पकड़ लिया और फिर उससे आग जलाने की कोशिश करने लगे, पर उन्हें इस काम में कामयाबी नहीं मिली और जुगनू उड़ गया, इससे बंदर निराश हो गए. इतने में गौरैया फिर से बोल उठी, “आप लोग मेरी बात मानिए, पत्थर रगड़कर आप आग जला सकते हैं.” इतने में एक गुस्साए हुए बंदर से रहा न गया और उसने पेड़ पर चढ़कर गौरेया के घोसले को तोड़ दिया. यह देख चिड़िया दुःखी हो गई और डर कर रोने लगी. इसके बाद वो उस पेड़ से उड़कर कहीं और चली गई.

कहानी से सीख

इस कहानी से यह सीख मिलती है कि जरूरी नहीं कि हर किसी को ज्ञान या उपदेश दिया जाए. उपदेश उसी को दिया जाना चाहिए जो समझदार हो और बातों को समझे. यानी बेवकूफ को उपदेश देने से खुद का ही बुरा हो सकता है.

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