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माता-पिता के इन आदतों से झगड़ालू बनते हैं बच्चे

बच्चों के सामने माता-पिता का हमेशा झगड़ना महंगा पड़ सकता है. रोजाना के इस झगड़े से बच्चे भी झगड़ालू प्रवृति के हो जाते हैं. Parental Fights Negative Impact

बच्चे की परवरिश में परिवार की भूमिका ही सबसे महत्वपूर्ण होती है. बच्चा वही सीखता है जो वह देखता है. वही देखता है जो परिवार के अन्य सदस्य करते हैं. माता-पिता (Parental Fights Negative Impact) से मिली शिक्षा से ही बच्चे का चरित्र निर्माण होता है.

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अक्सर देखा जाता है कि जब माता-पिता के बीच किसी बात को लेकर अनबन शुरू होती है तो वे बच्चों के सामने ही झगड़ने लगते हैं. कुछ घरों में तो माता-पिता के बीच हर छोटी-छोटी बात को लेकर झगड़ा होता रहता है.

हर वक्त ऐसा होते रहने पर घर का माहौल नकारात्मक हो जाता है. जिसका बुरा प्रभाव बच्चे पर पड़ता (Parental Fights Negative Impact) है. रोजाना होने वाले यह झगड़े बच्चे के दिमाग पर सीधा असर डालते हैं. इसे देखते-देखते बच्चा भी झगड़ालू बन जाता है.

सिर्फ झगड़ालू ही नहीं वह तनाव में भी रहने लगता है. इससे सीधा समझ आता है कि अगर किसी बच्चे का व्यवहार ऐसा है, इसका मतलब इसका दोषी उसके घर का माहौल या फिर माता-पिता की आदतें ही होती है.

छोटी-छोटी बातों पर लड़ना गलत –

छोटी-छोटी बातों पर लड़ना. विवाद बढ़ते-बढ़ते मारपीट तक पहुंच जाना. सिर्फ यही नहीं बात तलाक तक भी पहुंच जाती है. लेकिन क्या आपने सोचा है कि आपके लिए तो यह मात्र पति-पत्नी के बीच का झगड़ा है लेकिन इसका सीधा असर आपके बच्चे पर (Parental Fights Negative Impact) पड़ता है.

इस आपसी झगड़ों में उनकी जिंदगी तबाह हो जाती है. यही बच्चे जीवन में सही दिशा से भटक जाते हैं. माता-पिता के इन झगड़ों को रोजाना देखते-देखते बच्चों में भी इस तरह का व्यवहार घर कर जाती है.

वह भी घर हो या बाहर छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़ा करने को तैयार करता है. ऐसे ही बच्चों के माता-पिता को स्कूलों से शिकायतें मिलती रहती है. यह विषय बहुत ही गंभीर है. क्योंकि आपकी हरकत बच्चे को ना सिर्फ झगड़ना सिखाता है बल्कि यह उनके शारीरिक व मानसिक विकास में भी बाधा स्थापित (Parental Fights Negative Impact) करता है.

कारण (Parental Fights Negative Impact)

  • अध्ययन की मानें तो घर में होने वाले झगड़े व तनाव का बच्चे पर बुरा प्रभाव (Parental Fights Negative Impact) पड़ता है. लंबे समय तक तनाव में रहने वाले बच्चों में हार्मोन असंतुलन की समस्या हो सकती है. उनके अंदर इस तरह के हार्मोन का निर्माण होना शुरू हो जाता है जो उन्हें समय से पहले ही व्यस्क व झगड़ालू बना देते हैं.
  • जिस घर में माता-पिता के बीच रोजाना झगड़े हो तो वे अपने बच्चों से भी गुस्से में ही बात करते हैं. अभिभावक का बच्चों के साथ इस तरह का बर्ताव उनके कोमल मन पर आघात करता है. यही स्थिति रोजाना रहने पर बच्चे माता-पिता से डरने लगते हैं. बच्चे के मन में अपने अभिभावक के प्रति एक नाराजगी आ जाती है. फिर वह परिवार से कट कर बाहर अपनी खुशियां ढ़ूंढ़ने लगता है.
  • जिस घर में लड़ाई-झगड़ों की वजह से नकारात्मक माहौल रहे उस घर में बच्चे को भी अहमियत नहीं दी जाती. उसकी किसी भी बात को ध्यान से नहीं सुना जाता. जब बच्चे को महत्व नहीं दिया जाता वह चिड़चिड़ा भी हो जाता है.
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बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव (Parental Fights Negative Impact)

  • जिन घरों में माता-पिता के बीच हमेशा झगड़े होते रहते हैं उन घरों के बच्चे खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं.
  • बच्चे के अंदर खुद के वंचित होने की भावना घर कर जाती है.
  • वे अपने माता-पिता का भी सम्मान करना जरूरी नहीं समझते.
  • चिड़चिड़े व क्रोधी बन जाते हैं.
  • आत्मविश्वास की कमी के साथ-साथ उनके अंदर भय व हीन भावना घर कर जाती है.
  • ऐसे बच्चे भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं.
  • इन घरों की लड़कियों के शोषण का शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है.

ऐसे करें समाधान (Such Solution)

  • सबसे पहले तो बच्चों के सामने झगड़ा करने से बचें.
  • कोशिश करें कि बच्चे के सामने कभी भी झगड़ें नहीं.
  • बच्चों के सामने पति-पत्नी एक दूसरे को सम्मान दें. ताकि बच्चे के अंदर आपके प्रति कोई नकारात्मक भाव उत्पन्न ना हो.
  • कभी अगर किसी टॉपिक को लेकर बच्चों के सामने तर्क बंध जाए तो उसे प्यार से मैनेज करना चाहिए.
  • छोटी-छोटी विवादों से तो दूर रहने में ही भलाई है.
  • बच्चों के लिए अपने रिश्ते में थोड़ा सामंजस्य बनाकर चलना चाहिए.

शोषित होते हैं बच्चे (Parental Fights Negative Impact)

हर कोई चाहता है कि उसके घर का माहौल खुशनुमा रहे. लेकिन अभिभावकों के लड़ाई-झगड़े की वजह से स्वाभाविक है कि घर का माहौल नकारात्मक हो (Parental Fights Negative Impact) जाता है. माहौल खराब होने की वजह से बच्चे का मानसिक संतुलन सही नहीं रहता. घर में अगर लड़की है और टेंशन की वजह से उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है तो अन्य लोग इसका फायदा उठाते हैं.

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बच्चे का इस्तेमाल ना करें (Do not use Child)

कई बार देखा जाता है कि अभिभावक अपनी आपसी लड़ाई में बच्चे को भी शामिल कर लेते हैं. अगर घर में दो बच्चे हैं तो जो बच्चा उनका साइड लेता है उसे अपने साथ लड़ाई में शामिल करते हैं.

जिससे दूसरे बच्चे के मन में नफरत की भावना पैदा होती है. यानी लड़ाई-झगड़े बच्चों पर दुष्प्रभाव ही डालते हैं. एक सर्वे के अनुसार अपने माता-पिता के झगड़ों की वजह से 80 फीसद बच्चे चिड़चिड़े और तनावग्रस्त रहने लगते हैं.

आपके घर में भी कहीं यही स्थिति तो नहीं है? अगर नहीं है तो कोई बात नहीं लेकिन अगर है तो फिर सावधान होने की सख्त जरूरत है. क्योंकि आपके बच्चे का भविष्य आप पर ही निर्भर करता है. घर में रोजाना के लड़ाई-झगड़ों से घर का माहौल तो खराब होता ही है और बच्चे का भविष्य भी. क्या आप मेरे विचारों से सहमत हैं? अगर हां तो अपने अनुभव ‘योदादी’ के साथ कमेंट कर जरूर शेयर करें. #ParentalFight

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