Home Parenting Parenting style in hindi: जानिए आपके बच्चे के लिए उपयोगी पैरेंटिंग स्टाइल

Parenting style in hindi: जानिए आपके बच्चे के लिए उपयोगी पैरेंटिंग स्टाइल

बच्चे के जीवन की नींव परवरिश पर ही निर्भर है. परवरिश स्टाइल बच्चे के वर्तमान के साथ भविष्य को भी प्रभावित करता है. (Parenting style in hindi)

किसी भी बच्चे के जीवन की नींव परवरिश पर ही निर्भर करती है. इसी पर उनका पूरा भविष्य टिका होता है. आपके परवरिश की स्टाइल (Parenting style in hindi) बच्चे के वर्तमान के साथ-साथ भविष्य को भी प्रभावित करता है.

Parenting style in hindi

बच्चे को एक बेहतर इंसान बनाने के लिए कुछ माता-पिता उनके साथ बहुत ज्यादा ही सख्त हो जाते हैं. तो कुछ बहुत ज्यादा ही नर्म हो जाते हैं. सही से देखा जाए तो दोनों में से कोई भी अपनी जगह पर सही नहीं हैं. अच्छे माता-पिता बनने के लिए आपको परवरिश के सही स्टाइल का जानना जरूरी है.

यहां जानिए कौन सी परवरिश आपके बच्चे के लिए सही है- Parenting style in hindi

ऑथोरिटेटिव पैरेंटिंग

परवरिश के इस स्टाइल (Parenting style in hindi) को सबसे बेहतर की श्रेणी में रखा गया है. इस परवरिश की विशेषता यह है कि इसमें बच्चे व माता-पिता के बीच खुली बातचीत होती है. ऑथोरिटेरियन पैरेंटिंग की तरह इस पैरेंटिंग में भी बहुत सारे नियम कानून बनाए जाते हैं.

लेकिन असल में इन नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया जाता. इनके नियम लचीले होते हैं. मतलब इसमें काफी हद तक छूट की संभावनाएं रहती है. ऑथोरिटेटिव अभिभावक अपने बच्चे की गतिविधियों को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क रहते हैं. इनके बच्चे अगर गलती करें तो उसे गलत काम करने से रोकते हैं.

इसे भी पढ़ें: हर बच्चा अलग है तो उनकी परवरिश भी अलग होगी

इसके विपरीत सही कार्य करने पर प्रशंसा भी करते हैं. इन अभिभावकों में एक सबसे बढ़िया गुण यह भी होता है कि वे अपने बच्चों की बातों को ध्यान से सुनते हैं. बच्चों की बोलने की क्षमता को बढ़ावा देने से उनके ज्ञान में वृद्धि होती है, समझदारी बढ़ती है.

ऐसी परवरिश माता-पिता व बच्चों के बीच सकारात्मक संबंध को बढ़ावा देते हैं. विशेषज्ञों की मानें तो जिन बच्चों को ऐसी परवरिश मिलती है वे बच्चे हमेशा खुश व सफल होते हैं. ये बच्चे अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन करते हैं.

ऑथोरिटेरियन पैरेंटिंग

परवरिश की यह ऑथोरिटेरियन स्टाइल काफी सख्त माना जाता है. जो ऑथोरिटेरियन माता-पिता होते हैं उनका मानना है कि उनके बच्चे बिना किसी शर्त के उनकी सभी बातें मानें. ये खुद से अपना नियम बनाते हैं और बच्चे को उन्हीं नियमों का पालन करने को प्रेरित करते हैं.

ऐसे अभिभावक बच्चे को किसी तरह की समस्या समाधान करने वाले चैलेंज में शामिल नहीं होने देते. ऐसे घरों में बच्चे के किसी भी राय को महत्व नहीं दिया जाता. यानी माता-पिता जो चाहते हैं बच्चे को वही करना पड़ता है. ऐसे घरों में बच्चे अगर गलती करते हैं तो उन्हें समझाने के बजाय सजा देने का प्रावधान होता है.

अभिभावक को यही लगता है कि बच्चे को सजा देकर ही सुधारा जा सकता है. इनके बच्चे माता-पिता के साथ ज्यादा घुल-मिल नहीं पाते हैं और जरूरत से ज्यादा दोनों के बीच बात भी नहीं होती है. मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऑथोरिटेरियन माता-पिता के बच्चे शर्मिले व डरपोक के साथ-साथ पढ़ाई में भी पीछे रहते हैं.

नेग्लेटफूल पैरेंटिंग

नेग्लेटफूल पैरेंटिंग को सबसे बुरा पैरेंटिंग स्टाइल माना जाता है. इस परवरिश में बच्चों के लिए ना तो कोई नियम-कानून होते हैं और ना ही कोई सीमाएं. ऐसे माता-पिता लापरवाह किस्म के होते हैं.

इसे भी पढ़ें: फैमिली ट्री बनाने के 5 बेहतरीन क्राफ्ट आइडियाज

ये अपने बच्चों की आधारभूत जरुरतों को पूरा करने के लिए गंभीर नहीं होते या अपनी जिम्मेदारियों का सही से पालन नहीं करते. इनके बच्चों में आत्म विश्वास व आत्म सम्मान की भावना कम होती है. बाहरी लोगों के साथ इनका व्यवहार तो अच्छा रहता ही नहीं वे पढ़ने में भी अच्छे नहीं होते.

परमिसिव पैरेंटिंग

परमिसिव पैरेंट दयालु किस्म के होते हैं. वे अपने बच्चे को डांटने-मारने के पक्षपाती नहीं होते. इनके बच्चों को बहुत अधिक सीमाओं में नहीं रहना पड़ता. क्योंकि ये अभिभावक बच्चों को सीमाओं में रखना पसंद नहीं करते. बच्चे अगर किसी चीज की मांग कर दे तो इनके मुंह से ना शब्द निकलना बड़ा कठिन हो जाता है. यानी वे बच्चे की सभी मांगों को पूरा करने लिए तैयार रहते हैं.

ऐसे लोग माता-पिता से ज्यादा दोस्त की तरह बच्चे के साथ व्यवहार करते हैं. वे बच्चों से उनकी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करते हैं. लेकिन एक दिक्कत यह भी है कि अगर उनका बच्चा कोई गलत काम कर रहा होता है तो वे उसे रोकने में असफल होते हैं. यही वजह है कि इनके बच्चों में अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं होती.

जिस बच्चे कि गतिविधियों पर शुरू से नियंत्रण नहीं रखा जाता तो ऐसे बच्चे अहंकारी बन जाते हैं. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चे को एकदम से छूट नहीं देनी चाहिए. ज्यादा छूट मिलने पर उनके अंदर का भय खत्म हो जाता है. इसलिए बच्चों के लिए कुछ सीमाएं होना अति आवश्यक है.

बेस्ट है ऑथोरिटेटिव पैरेंटिंग Parenting style in hindi

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार ऑथोरिटेटिव पैरेंटिंग (Parenting style in hindi) को सबसे अच्छी श्रेणी का माना गया है. यह परवरिश बच्चों के लिए बहुत ही लाभकारी है.

अच्छी परवरिश से ही सुंदर व्यक्तित्व निखरता है. इस सुंदर व्यक्तित्व के लिए आपको परवरिश संबंधी कुछ बारीकियों को जानना अहम है. कई बार जानकारियों के अभाव में भी आप रास्ता भटक जाते हैं. अब आप अपनी परवरिश को लेकर दुविधा में तो नहीं है? तो हमारे इस आलेख को पढ़ें व अन्य लोगो के साथ भी साझा करें. ‘योदादी’ के साथ अपने इस अनुभव को कमेंट कर जरूर शेयर करें.

(योदादी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here