Home Education मदर टेरेसा क्यों पहनती थी नीले रंग की साड़ी?

मदर टेरेसा क्यों पहनती थी नीले रंग की साड़ी?

मानवता की धनी मदर टेरेसा आज भी लोगों के हृदय में जीवित हैं. उनके उदारवादी विचार हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं. Mother Teresa Jayanti

समाज सेवा करना तमाम नेक कामों में से एक है. इस कार्य में आत्मिक संतुष्टि के साथ-साथ लोगों का भरपूर स्नेह भी मिलता है. हमारे देश में भी कई सारे समाज सेवी (Mother Teresa Jayanti) हुए हैं. जिन्होंने मानवता की सेवा में ही अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया.

इन्हीं नेक दिल लोगों से में एक थीं महान समाज सेवी मदर टेरेसा (Mother Teresa Jayanti). भारत रत्न मदर टेरेसा का हर कोई सम्मान करता है. उनका जन्म 26 अगस्त 1910 को मेसिडोनिया की राजधानी स्कोप्जे मे हुआ था.

उनके अच्छे विचारों की वजह से ही मदर आज भी लोगों के हृदय में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ संस्था के रूप में जीवित हैं. टेरेसा एक रोमन कैथोलिक सन्यासिनी व ईसाई धर्म प्रचारक थीं. उन्होंने गरीबों व असाध्य बीमारी से पीड़ित रोगियों की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था.

मदर टेरेसा के पास अलग-अलग समय पर कुल 5 देशों की नागरिकता रही. इन देशों में भारत, ऑटोमन, सर्बिया, बुल्गेरिया व युगोस्लाविया शामिल है. उनके द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी नामक संस्था आज 123 देशों में सक्रिय है.

इसमें कुल 4500 सिस्टर हैं. इन्होंने कोलकाता में वर्ष 1948 में काम शुरू किया था. तभी से उन्होंने नीले बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहननी शुरू की थी. इनका कहना था कि जख्म भरने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठ से कहीं ज्यादा पवित्र होते हैं.

दुनिया के लिए शांति दूत मानी जाने वाली मदर टेरेसा (Mother Teresa Jayanti) को वर्ष 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उनके विचारों ने समाज में शांति व प्रेम स्थापित करने का काम किया. मदर के कुछ विचार आज भी हमारे लिए प्रेरणादायी है. इनके विचारों पर अमल कर आप एक बेहतर इंसान बन सकते हैं.

तो आईए आपको मदर टेरेसा के अनमोल विचारों के बारे में बताते हैं –

मदर टेरेसा के विचार – Mother Teresa Jayanti

1. कल तो चला गया, आने वाला कल भी आया नहीं. हमारे पास केवल आज है. आईए शुरुआत करें.

2. भगवान यह अपेक्षा नहीं करते कि हम सफल हों. वे तो केवल इतना चाहते हैं कि हम प्रयास करें.

3. छोटी-छोटी बातों में विश्वास रखें क्योंकि इनमें ही आपकी शक्ति निहित है. यही आपको आगे ले जाती है.

4. यदि हमारे मन में शांति नहीं है तो इसकी वजह है कि हम यह भूल चुके हैं कि हम एक दुसरे के हैं.

5. जिसे आपने कई वर्षों में बनाया है वह रात भर में नष्ट हो सकता है. तो क्या हुआ आगे बढ़िए और उसे बनाते रहिए.

6. हम कभी नहीं जान पाएंगे कि एक छोटी सी मुस्कान कितना भला कर सकती है और यह कितनों को खुशी दे सकती है.

7. कुछ लोग विसंगत, अवास्तविक व आत्म केंद्रित होते हैं फिर भी उन्हें प्यार दीजिए.

8. लोग कुष्ठ रोग को सबसे बड़ी बीमारी मानते हैं लेकिन ऐसा नहीं है. सबसे बड़ी बीमारी तो अवांछित होना है.

मदर क्यों पहनती थी नीले रंग की साड़ी?

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मदर टेरेसा (Mother Teresa Jayanti) हमेशा नीले बॉर्डर वाली साड़ी ही पहना करती थी. संत की उपाधि से सम्मानित टेरेसा की नीले बॉर्डर वाली साड़ी को इंटलैक्चुअल प्रॉपर्टी के रूप में मान्यता दी गई है. अल्बानियाई मूल की टेरेसा कुछ समय के लिए नन भी रहीं.

वर्ष 1948 से वह सड़कों पर गरीबों व निसहाय लोगों की सेवा करनी शुरू की. नीले बॉर्डर वाली यह सफेद साड़ी उनकी पहचान बन गई. धीरे-धीरे उनकी पहचान पुरानी हो गई. सरकार का कहना है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी अपने प्रचार में विश्वास नहीं करता.

यही वजह थी कि उसे प्रचारित नहीं किया गया. लेकिन दुनिया भर में इस डिजाइन के गलत इस्तेमाल देखकर इस व्यापार चिन्ह को लेकर लोगों में जागरुकता फैलाने की कोशिश की जा रही है.

मिशनरीज ऑफ चैरिटी के लिए रंग व्यापार चिन्ह संरक्षण के विचार के तहत नीले बॉर्डर का पैटर्न एक विशेष प्रतीकात्मक पहचान है. इसके लिए व्यापार चिन्ह रजिस्ट्री में 12 दिसंबर 2013 को आवेदन दायर किया गया था.

तीन वर्षों की कानूनी प्रक्रियाओं के बाद तब जाकर इसे मंजूरी मिली थी. प्रति वर्ष ऐसी करीब 4000 साड़ियां तैयार की जाती है और इसे दुनिया भर की ननों में बांटा जाता है.

मदर हाउस कोलकाता – Mother Teresa House Kolkata

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कोलकाता स्थित मदर हाउस में मदर टेरेसा (Mother Teresa Jayanti) आज भी जीवित हैं. इस उदारवादी हृदय के लिए हर जाति, हर धर्म के लोगों में प्रेम है. यह वजह है कि हर कोई इनके दर्शन करने के लिए मदर हाउस पहुंचता है.

पर्यटक भी कोलकाता धूमने के दौरान मदर हाउस का दर्शन करना नहीं भूलते. इसके अलावा यहां स्थानीय लोग भी उनकी समाधि दर्शन करने आते हैं.

जिस कमरे में मदर की समाधि है ठीक उसके पास वाले कमरे को गैलरी का रूप दे दिया गया है. उनके जीवन की उपाधियों को दर्शाया गया है. जिसमें उनके बचपन से लेकर जीवन के अंत तक की तस्वीरें लगी है.

सीधे तौर पर यह कहा जा सकता है कि मदर मर कर भी अमर हैं. वह हर दिल में बसती हैं. अपनी पूरी जिंदगी उन्होंने परोपकार में ही बिता दी. मानवता के प्रति उनके समर्पण की वजह से वह आने वाले दिनों में भी यूं हीं जीवित रहेंगी. #MotherTeresaJayanti

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