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कहीं आपके शिशु में भी तो नहीं है सूखा रोग के लक्षण – Rickets In Hindi

बच्चे का सेहत अगर ठीक ना रहे तो सावधान रहें. आपका बच्चा सूखा रोग या क्षय रोग (Rickets in Hindi) का शिकार हो सकता है.

आपने देखा और सुना भी होगा कि कई बच्चों में पर्याप्त सबकुछ खाने के बाद भी उनकी सेहत नहीं बनती है. बच्चे की सेहत का न बनना तो हर माता-पिता के लिए चिंता का विषय है. क्यूंकि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा स्वस्थ्य रहे. लेकिन ध्यान रहे अगर आपके बच्चे में भी सेहत ना बनने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करें. क्यूंकि हो सकता है आपका बच्चा सूखा रोग या क्षय रोग (Rickets in Hindi) का शिकार हो गया हो. हालांकि आप चाहें तो इस बीमारी के इलाज के लिए घर पर भी कुछ उपाय आजमा सकते हैं.

Rickets in Hindi

सूखा रोग है क्या? – Rickets in Hindi

सूखा रोग हड्डियों में होने वाली एक प्रकार की बीमारी है. इस बीमारी में बच्चे की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं. हड्डियों के कमजोर होने से बच्चे का विकास रूक जाता है. इसकी वजह से मेरूदंड में असामान्य मोड, पैरों में टेढ़ापन, बच्चे में कुरूपता मांसपेशियां ढ़ीली पड़ना व ऐंठन, हड्डियों में फ्रैक्चर और बौनापन की आशंका भी बढ़ जाती है. इस बीमारी की मुख्य वजह शरीर में विटामिन डी, फॉस्फेट और कैल्शियम की कमी है. कई बार सूखा रोग अनुवांशिक कारणों की वजह से भी हो सकता है.

सूखा रोग का कारण – Causes of Rickets in Hindi

बच्चे के शरीर को अगर पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी नहीं मिल पा रही है या फिर बच्चे का शरीर विटामिन डी का सही से इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है तो ऐसे में सूखा रोग की संभावना बढ़ जाती है. यह बीमारी मुख्य रूप से 36 महीने से लेकर 6 साल की उम्र तक के बच्चों में हो सकती है. ज्यादातर उन क्षेत्रों में इस बीमारी की संभावना अधिक है जहां धूप कम होती है और बच्चे सिर्फ शाकाहारी भोजन ही करते हैं.

अब यह जानना भी जरूरी है कि बच्चे में विटामिन की कमी क्यूं होती है, तो इसके दो कारण हैं, जैसे-

धूप और खाद्य पदार्थRickets in Hindi

धूप में जाते ही आपके शरीर में विटामिन डी का निर्माण होने लगता है. अब समस्या है कि आजकल के बच्चे धूप में बिल्कुल नहीं निकलते या फिर बहुत कम समय के लिए निकलते हैं. यहां तक की सनस्क्रीन लगाकर निकलने वाले बच्चे की त्वचा पर भी सूर्य की किरणें नहीं पड़ पाती. जिससे शरीर को विटामिन डी बनाने में बाधा उत्पन्न होती है.

वहीं दूसरी ओर मछली का तेल और अंडे की जर्दी में पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी होती है. इसके अलावा दूध और कई सारे फलों में भी विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में होती है. इन चीजों का कम सेवन करने पर भी शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है.

सूखा रोग के लक्षणSymptoms of Rickets in Hindi

1. कोहनी, कलाई और टखनों की हड्डियों के सिरे सामान्य से बड़े होने की वजह से इनमें सूजन हो जाता है.

2. दांतों की संरचना खराब होना यानी दांत विकसित होने में देरी, दांत के बाहरी परत में छेद और मसूड़ों में फोड़ा इत्यादी की समस्या.

3. बाजू, टांग, रीढ़ की हड्डी में दर्द होना.

4. बच्चे के रेंगने और चलने में सामान्य से ज्यादा वक्त लगना.

5. शरीर में कुरूपता जैसे माथा का बाहर की तरफ निकला होना, टांगों का बाहर की तरफ मुड़ना, सीने की हड्डियों का बाहर की तरफ उभरना व रीढ़ की हड्डी की मुड़ना.

6. बच्चे के स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना.

7. कई बार सूखा रोग ग्रस्त बच्चों के शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाने की वजह से बच्चे में मिर्गी की समस्या देखी जाती है.

सूखा रोग से बचाव – Prevention of Rickets in Hindi

1. सूखा रोग से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है कैल्शियम, फॉसफोरस और विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना.

2. इस बीमारी से बचाव के लिए नियमित रूप से थोड़ी देर के लिए ही सही लेकिन धूप के संपर्क में आना. सिर्फ हाथों और चेहरे को धूप के संपर्क में लाकर भी इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है. इस प्रक्रिया को सप्ताह में मात्र 2-4 बार कर सकते हैं.

3. विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों जैसे मछली, अंडा, दूध, चीज और मशरूम के अलावा डेयरी उत्पाद, संतरे का जूस, सेरियल्स और सोया दूध आदि.

बचाव के घरेलू उपाय – Home Remedies for Rickets in Hindi

1. बैगन

चने की रोटी के साथ लंबे वाले बैगन की सब्जी खाना लाभकारी साबित होगा.

2. पपीता

बच्चे को नियमित रूप से सुबह-शाम दो-दो चम्मच पपीते का रस पीलाना फायदेमंद साबित होगा.

3. जामुन और सिरका

एक चम्मच जामुन के रस को आधा चम्मच सिरके में मिलाकर उसकी चार खुराक बना लें. इसकी एक-एक खुराक बच्चे को दिन में चार बार पिला दें.

4. पीपल और सौंफ

सौंफ के अर्क में छोटी पीपल को घिसकर बच्चे को चटाने से उसकी पाचन तंत्र प्रणाली मजबूत होती है.

5. मकोय और कपूर

एक चम्मच मकोय के पत्ते की रस में दो रत्ती कपूर मिला कर इसकी दो खुराक करके बच्चे को सुबह-शाम चटा दें, तो फायदा मिलेगा.

6. अपामार्ग और दही

सूखा रोग से राहत पाने में अपामार्ग और दही भी फायदेमंद है. दो रत्ती अपामार्ग का क्षार दही में मिलाकर बच्चे को खिलाने से रोग में काफी राहत मिलेगी.

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