Home Education कहीं आप भी तो अपने बच्चे को कम उम्र में नहीं भेज...

कहीं आप भी तो अपने बच्चे को कम उम्र में नहीं भेज रहे स्कूल?

अगर पूछा जाए कि बच्चे को इतनी जल्दी स्कूल (Right age for sending children to school) क्यों भेज रहे हैं तो जवाब उनका होता है कि आसपास के बच्चे 2 से ढ़ाई साल में ही स्कूल जाने लगे हैं, इसलिए हमने भी अपने बच्चे को स्कूल भेजना शुरू कर दिया है.

बच्चे को स्कूल भेजने की सही उम्र को लेकर हर व्यक्ति में अपनी अलग-अलग मान्यताएं हैं. हमारे घरों में बच्चे के जन्म लेने के साथ ही उसकी पढ़ाई को लेकर विचार विमर्श शुरू हो जाते हैं कि बच्चे को कब से और कौन से स्कूल में भेजना है. भारत में अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को दो से तीन साल की उम्र में ही स्कूल या प्रेप स्कूल में भेजना आरंभ कर देते हैं.

right-age-for-sending-children-to-school

उनसे अगर पूछा जाए कि बच्चे को इतनी जल्दी स्कूल (Right age for sending children to school) क्यों भेज रहे हैं तो जवाब उनका होता है कि आसपास के बच्चे 2 से ढ़ाई साल में ही स्कूल जाने लगे हैं, इसलिए हमने भी अपने बच्चे को स्कूल भेजना शुरू कर दिया है. बच्चे को स्कूल भेजने की उम्र को लेकर गंभीरता से विचार करना जरूरी है. अक्सर माता-पिता की सोच होती है कि बच्चे को ढ़ाई साल की उम्र से ही प्ले स्कूल में डाल दें. ताकि बच्चा कुछ तो सीख जाएगा.

इसके लिए बच्चों की इंटरव्यू की भी तैयारी होने लगती है. छोटे बच्चों को एडमिशन की रेस की तैयारी में लगा दिया जाता है. लेकिन यह जानना जरूरी है कि बच्चों के लिए यह ठीक नहीं है. इस पर हुए शोध और वैज्ञानिक भी इतनी छोटी उम्र में स्कूल भेजने का समर्थन नहीं करते. तो आइए जानते हैं इस बारे में शोध में क्या खुलासा हुआ है.

क्या कहता है शोध – Right age for sending children to school

रिसर्च के अनुसार बच्चों को जल्दी स्कूल भेजने का उनके व्यवहार पर दुष्प्रभाव पड़ता है. शोध में कहा गया है कि बच्चों को स्कूल भेजने की उम्र ज्यादा होनी चाहिए. क्यूंकि बच्चे की उम्र जितनी जितनी ज्यादा होगी बच्चे का खुद पर उतना ही अधिक आत्मनियंत्रण होगा. और वह उतना ही ज्यादा हाइपर एक्टिव होगा. शोध में कहा गया है कि बच्चे को 5 साल की उम्र के बजाय 6 या फिर 7 साल की उम्र में स्कूल भेजना सही रहता है.

रिसर्च में पता चला है कि 6 साल की उम्र में जिन बच्चों को किंडरगार्डन भेजा गया था उनका 7 से 11 साल की उम्र में सेल्फ कंट्रोल बहुत बढ़िया था. साइकोलॉजिस्ट कहते हैं कि सेल्फ कंट्रोल एक ऐसा गुण है जिसे बच्चों में शुरुआती समय में ही विकसित किया जा सकता है. सेल्फ कंट्रोल से परिपूर्ण बच्चे किसी भी परेशानियों और चुनौतियों का सामना फोकस के साथ बड़ी आसानी से करते हैं.

कैसे हुआ रिसर्च – Right age for sending children to school

रिसर्च के दौरान मुख्य रूप से 7 साल की उम्र के बच्चों के मेंटल हेल्थ पर फोकस किया गया था. जिसके लिए करीब 54,241 माता-पिता का फीडबैक लिया गया. जबकि 11 साल की उम्र के बच्चों की मेंटल हेल्थ के लिए 35,902 अभिभावकों का फीडबैक लिया गया था. शोध के रिजल्ट में पाया गया कि जिन बच्चों ने एक साल देरी से स्कूल जाना शुरू किया था उन बच्चों का हइपर एक्टिव लेवल 73 फीसद बेहतर था.

कुछ समय पहले एक खबर छपी थी जिसमें दुनिया के विभिन्न विकसित देशों के बच्चों की विद्यालय में प्रवेश की उम्र दी गी थी. इसमं कुछ देशों में 5 साल, कुछ में 6 साल और एक, दो देशों में 7 साल की उम्र में स्कूल में दाखिले की जानकारी दी गई थी. प्राचीन काल से औपचारिक विद्या आऱंभ करने की उम्र 7 वर्ष मानी गई है. 7 वर्ष की उम्र से पहले शिक्षा ग्रहण करने पर शिक्षा और शिक्षार्थी दोनों को ही नुकसान होता है. पढ़ाई के लिए 7 साल से 25 साल यानी कुल 18 वर्ष की आयु को ही पर्याप्त माना जाता है.

वर्तमान समय के हिसाब से अगर आपको बहुत जल्दी है तो 4 वर्ष की आयु में बालवाड़ी या किंडर गार्डन में दाखिला दिला सकते हैं. इससे कम उम्र में बच्चों को स्कूल भेजना निसंदेह गलत है.

क्लास 1 में कितनी होनी चाहिए उम्र?

राइट टू एजुकेशन ऐक्ट 2009 के अनुसार क्लास 1 में पढ़ने वाले बच्चे की उम्र 6 साल होनी चाहिए. लेकिन भारतीय माता-पिता की जल्दबाजी के कारण बहुत सारे बच्चे 4 साल की उम्र में ही कक्षा 1 में पहुंच जाते हैं. ऐसा ना सिर्फ शहरों में बल्कि गांवों में भी यही फैशन देखने को मिल रहा है. ऐनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट 2019 के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में पढ़ने वाले हर 5 में से एक 1 बच्चा 6 साल से कम उम्र में ही कक्षा 1 में पहुंच जाता है.

कम उम्र का क्या पड़ता है प्रभाव?

बच्चे की उम्र अगर ज्यादा रहती है तो चीजों को सीखने और समझने की उसकी संज्ञानात्मकत स्किल्स अच्छी रहती है. खासकर इनकी नंबरों और अक्षरों को पहचानने, पढ़ने और याद रखने की क्षमता अच्छी रहती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब बहुत कम उउम्र के बच्चों को फॉर्मल स्कूल में दाखिला करा देने पर वह बच्चा अपनी पूरी जिंदगी में एकेडमिक के मामले में दूसरे बच्चों से पीछे रह जाते हैं.

यूके और यूएस में क्या है उम्र का फॉर्मूला?

यूके में फॉर्मल स्कूलिंग शुरू करने की न्यूनतम उम्र 5 साल है, वहीं यूएस (अमेरिका) में 6 साल है. फॉर्मल स्कूलिंग के तहत ही प्लेस्कूल और किंडरगार्डन में बताए गए साल भी काउंट होते हैं. यूके और यूएस दोनों देशों में बच्चों को किंडरगार्डन में ऐडमिशन कराने के लिए भी 5 या 6 साल का होना जरूरी है. स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च की मानें तो अगर बच्चों को थोड़े अधिक उम्र में स्कूल में इनरॉल कराया जाता है तो इससे उनकी अकैडमिक अचीवमेंट बेहतर होती है और साथ ही बच्चे की क्राइम तरफ रुचि भी घटती है.

(योदादी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here