Home Trending सोशल मीडिया पर साड़ी के ट्रेंड करने के राज!

सोशल मीडिया पर साड़ी के ट्रेंड करने के राज!

साड़ी भारतीय संस्कृति की पहचान है. यह सांस्कृतिक परंपरा सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इसे खूब पसंद किया जा रहा है. Saree Trends

साड़ी हमारी संस्कृति से जुड़ा सबसे खूबसूरत परिधान है. सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इसका प्रचलन शुरू हो रहा है. यह भी कह सकते हैं कि साड़ी की खूबसूरती (Saree Trends) विदेशों तक फैली है.

Saree Twitter

भारत घूमने आने वाली विदेशी मेहमानों को भी साड़ी खूब भाता है. वे लोग में भारत में आकर साड़ी पहनकर इस भारतीय परिधान की खूबसूरती को महसूस करती हैं.

साड़ी (Saree Trends) का भारतीय संस्कृति से गहरा नाता रहा है. सिर्फ भारत ही नहीं नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश व पाकिस्तान जैसे एशियाई देशों में महिलाओं का साड़ी पहनने का प्रचलन है. साड़ी की लोकप्रियता आज बहुत बढ़ गई है.

समय के साथ-साथ इसके डिजाइन में काफी परिवर्तन आया है. साड़ी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए विदेशों में भी साड़ी स्पेशल मॉडलिंग इवेंट्स का आयोजन किया जा रहा है.

फिल्म इंडस्ट्री, राजनीति समेत हर वर्ग की महिलाएं ले रही हिस्सा –

सोशल मीडिया पर आए दिन कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है. कभी कोई चैलेंज चल रहा होता है तो कभी कोई ट्रेंड. जैसे इन दिनों ट्वीटर पर #sareetwitter ट्रेंड चल रहा है.

जिसमें फिल्म इंडस्ट्री, राजनीति व घरेलू महिलाओं से लेकर हर क्षेत्र की महिलाएं हिस्सा ले रही हैं. हर कोई साड़ी में अपनी खूबसूरत तस्वीरों को साझा कर रही है.

ट्वीटर पर यह ट्रेंड बहुत तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें हर कोई अपनी साड़ी (Saree Trends) पहनी हुई तस्वीरों को साझा करते हुए साड़ी की खूबसूरती के बारे में बता रहे हैं.

हुआ यूं कि न्यूयॉर्क टाइम्स में साड़ी को लेकर एक आर्टिकल छपी थी. जिसमें साड़ी की गरिमा व उसके इतिहास की जानकारी दी गई थी. इसमें कहा गया है कि वर्ष 2014 में भाजपा की जीत के बाद साड़ी को प्रमोट किया जा रहा है.

पीएम मोदी के चुनाव जीतने के बाद से बनारसी साड़ी बनाने वाले बुनकरों की समस्याओं की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इस आर्टिकल का लोगों पर बहुत बुरा असर हुआ. सभी ने इस पर नाराजगी व्यक्त की.

लोगों का कहना है कि इस आर्टिकल को बहुत खराब तरीके से लिखा गया है. इसमें तर्क भी गलत दिए गए हैं. बस इसके बाद ही सोमवार से ट्वीटर पर #sareetwitter ट्रेंड शुरू हो गया.

प्रियंका गांधी व यामी गौतम के अलावा आम महिलाएं भी शामिल –

इस ट्रेंड में ना सिर्फ प्रियंका गांधी वाड्रा व अभिनेत्री यामी गौतम ने ही हिस्सा लिया है बल्कि आम महिलाएं भी बढ़चढ़ कर अपनी साड़ी में तस्वीरें साझा कर रही हैं.

प्रियंका गांधी ने साड़ी में अपनी 22 साल पुरानी तस्वीर ट्वीटर पर साझा करते हुए लिखा है कि मेरी शादी वाले दिन सुबह की पूजा के दौरान की 22 साल पुरानी तस्वीर. शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी व भाजपा के नुपूर शर्मा ने भी अपनी पसंदीदा तस्वीर साझा की है.

इस ट्रेंड की एक खास बात है कि यहां हर कोई अपने-अपने राज्य की प्रसिद्ध साड़ियों (Saree Trends) में अपनी तस्वीरें साझा कर रहा है.

आइए आपको साड़ी से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताते हैं –

विशेष अवसर पर साड़ी पहनने का फैशन –

आधुनिकता के इस दौर में फैंसी साड़ियों का चलन तो है. लेकिन इसे रोजाना पहननें वालों की संख्या कम है. साड़ी को मुख्य रूप से फैशन के तौर पर, किसी कार्यक्रम में व्यवहार किया जाता है.

आज के फैशन डिजाइनर साड़ियों को इतने खूबसूरत तरीके से पहनाते हैं कि इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है. इंडिया में किसी शादी समारोह, बर्थडे पार्टी, पूजा त्योहार आदि विशेष अवसर पर साड़ी पहनने का प्रचलन है. जो आज भी चला आ रहा है.

सबके लिए आसान नहीं साड़ी पहनना – Saree Trends

साड़ी आदिकाल से भारतीयता की पहचान है. इसकी लंबाई सभी परिधानों से ज्यादा है. वैसे तो एक साड़ी की औसत लंबाई 3.5 गज से 9 गज तक होती है.

क्या आपको पता है साड़ी बांधने के 100 से भी ज्यादा तरीके हैं. लेकिन महिलाओं को एक ही तरह से साड़ी बांधते हुए देखा होगा. इस तरीके को निवी ड्रेप कहते हैं.

जहां तक साड़ी पहनने की बात है तो कई ऐसी महिलाएं हैं जिनके लिए साड़ी पहनना सबसे मुश्किल काम है.

लेकिन कई महिलाएं ऐसी होती हैं जो साड़ी के सिवा कुछ और पहनती ही नहीं. एक सर्वे के मुताबिक इंडिया में करीब 95 फीसद महिलाएं अन्य महिलाओं से साड़ी पहनना बेहतर विकल्प समझती हैं.

Priyanka Gandhi & Yami Gautam

साड़ियों पर हाथों की कढ़ाई – Saree Trends

मॉडर्न जमाने में साड़ी को ज्यादा से ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए उस पर कढ़ाई य एम्बॉयडरी भी की जाती है. कढ़ाई के इस काम से देश में लाखों लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं.

टेक्सटाइल मिनिस्ट्री की वर्ष 2016 की रिपोर्ट के अनुसार साड़ी पर कढ़ाई करने वाले देश के करीब 1 करोड़ से ज्यादा बुनकरों को रोजगार मिले हैं.

ब्लाउज और पेटीकोट के बगैर भी पहन सकते हैं साड़ी –

भारत में बहुत सालों पहले साड़ी बगैर ब्लाउज व पेटीकोट के भी पहना जाता था. धीरे-धीरे महिलाओं ने ब्लाउज व पेटीकोट भी पहनना शुरू किया. कहने का मतलब है कि इनके बिना भी साड़ी पहनी जा सकती है. हालांकि यह मुश्किल होगा. #SareeTwitter

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