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शिव भक्तों के लिए ‘सावन का महीना’ क्यों होता है खास?

सावन के महीने (Sawan Ka Mahina) में भगवान शिव बहुत खुश रहते हैं. यह महीना उनके लिए कई मायनों में बहुत प्रिय है. जानिए, 'सावन का महीना' क्यों होता है खास?

सावन के महीने (Sawan Ka Mahina) में भगवान शिव बहुत खुश रहते हैं. यह महीना उनके लिए कई मायनों में बहुत प्रिय है. इस महीने में शिव की विशेष पूजा (Shiv Ki Puja) करने की प्राचीन परंपरा है. सावन के महीने की प्राकृतिक रूप से भी अपनी अलग ही खासियत है. इस महीने शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगती हैं. मान्यता है कि देवी सती का पर्वती के रूप में पर्वतराज हिमालय के घर पर सावन में ही दुबारा जन्म हुआ था.

Sawan Ka Mahina

माता पार्वती ने शिव शंकर को दुबारा अपना पति बनाने के लिए सावन के महीने (Sawan Ka Mahina) में ही कठिन तपस्या की थी. देवी पार्वती की कठोर तपस्या से खुश होकर शिव जी ने उनकी मनोकामना को पूरा करते हुए उनसे विवाह किया. इसीलिए कहा जाता है कि सावन से प्रारंभ कर सोलह सोमवार का व्रत करने से कन्याओं को सुंदर वर की प्राप्ति होती है. वहीं पुरुषों को सुंदर पत्नी मिलती है. चूंकि सावन के महीने में ही शिवजी की देवी पार्वती से शादी हुई थी इसलिए यह महीना उनका सबसे प्रिय महीना बताया जाता है. वहीं इस बारे में कई और मान्यताएं हैं, उनको यहां जानते हैं!

सावन का महीना और प्रचलित मान्यताएंSawan Ka Mahina

पौराणिक मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ से ही त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश ही इसकी रक्षा करते आ रहे हैं. सावन के शुरू होने से ठीक पहले भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी पर योग निद्रा में चले जाते हैं. इस दौरान वे सृष्टि के पालन की पूरी जिम्मेदारी से मुक्त होकर पाताललोक में विश्राम करते हैं.

भगवान विष्णु के विश्राम पर चले जाने के बाद सारा कार्यभार भगवान शिव के कंधे पर आ जाता है. सावन महीने की शुरूआत होते ही शिवजी जागृत होकर माता पार्वती के साथ पृथ्वी लोक का पूरा कार्यभार संभाल लेते हैं. इसीलिए सावन महीना शिव के लिए खास होता है. यही कारण है कि सावन के महीने में इनकी पूजा का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक भी किया जाता है.

खासकर कांवरिए देशभर के शिव मंदिरों में जल चढ़ाते हैं. देवघर और तारकेश्वर सहित कई शिव स्थलों पर भारी भीड़ जुटती है. आखिर भगवान शिव के जल अभिषेक को लेकर क्या मान्यता है, यहां जान लेते हैं!

भगवान शिव को जल क्यों चढ़ाते हैं? Kanvar Yatra

कहा जाता है कि जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन चल रहा था उस वक्त समुद्र से विष का घड़ा निकला था. इस घड़े को न ही देवता लेने को तैयार थे और ना ही असुर. तब जाकर इस विष के प्रभाव को खत्म कर समस्त लोकों की रक्षा करते हुए शिव जी ने इस विष का पान किया था. इस विष के प्रभाव से शिव शंकर का ताप बढ़ता जा रहा था.

इस स्थिति से चिंतित सभी देवताओं ने विष के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शिव के सिर पर जल चढ़ाना (Kanvar Yatra) शुरू कर दिया था. बस तभी से सावन के महीने में शिव शंकर का जलाभिषेक (Kanvar Yatra) करने की परंपरा चलती आ रही है और शिव की पूजा करने के लिए इस महीने को शुभ माना जाता है.

इस महीने में सबसे ज्यादा बारिश होती है और इस बारिश के पानी से भगवान शिव के शरीर को ठंडक मिलती है. अपने विष तप्त शरीर से जुड़ी कहानियों का जिक्र करत हुए शिव शंकर ने स्वयं सनतकुमारों को सावन महीने की महिमा सुनाई थी. शिव जी ने कहा था कि उनके तीनों नेत्रों में दाहिने में सूर्य, बाएं में चंद्र और मध्य में अग्नि वास करते हैं.

सावन महीने का नक्षत्रों के साथ कनेक्शनSawan Ka Mahina

हिन्दू वर्ष में महीनों के नाम नक्षत्रों के आधार पर रखे गए हैं. जैसे पहला महीना चैत्र, जो चित्रा नक्षत्र से संबंधित है. वहीं सावन का महीना श्रवण नक्षत्र से संबंधित है. इसका स्वामी चंद्र होता है और चंद्रमा शिव जी के मस्तक पर सुशोभित है. सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने का प्रारंभ सावन महीने में ही होता है. सूर्य पर चंद्रमा की ठंडक होती है इसलिए सूर्य के कर्क राशि प्रवेश करने पर वर्षा होती है. इससे विष ग्रहण करने वाले शिव जी को ठंडक मिलती है और यही कारण है कि यह महीना महादेव का प्रिय होता है.

आध्यात्म से सराबोर है सावन Sawan Ka Mahina

हरियाली से भरपूर सावन के महीने में माहौल बहुत खुशनुमा होता है. हर तरफ हरियाली ही हरियाली रहती है. यहां के वातावरण में सावन को ही सबसे बढ़िया महीना बताया जाता है. इस मौसम में ना तो अधिक गर्मी होती है और ना ही सर्दी. आध्यात्मिक दृष्टि से सावन महीने का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है. यह महीना विशेष रूप से भगवान को ही समर्पित होता है. कहा जाता है कि इस महीने में शिव की आराधना करने पर मनुष्य को शुभ फल की प्राप्ति होती है.

महादेव के रुद्राभिषेक का महत्व सावन के महीने में बढ़ जाता है. इस महीने में विशेषकर सोमवार को रुद्राभिषेक करने वाले पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है. रुद्राभिषेक के बाद बेलपत्र, कुश, शमीपत्र और दूब आदि से भोलेबाबा को प्रसन्न किया जाता है और अंत में भांग, धतूरा और श्रीफल से शिव जी को भोग के रूप में समर्पित किया जाता है. कथा के अनुसार, जो व्यक्ति पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना करता है तो वह सभी प्रकार के कष्टों और चिंताओं से मुक्त हो जाता है.

सावन का सोमवार भी होता है खासSawan me Somvar Ka Mahatwa

कहा जाता है कि सावन सोमवार (Sawan Somvar) को व्रत रखने और ध्यान पूर्वक पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं इसलिए व्यक्ति को भी इस पूजा से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है. सोमवार का व्रत रखते समय सिर्फ एक वक्त फल का सेवन किया जाता है.

इस महीने में शिव के भक्त कांवरिए (Kanvar Yatra) गंगा नदी या फिर अन्य नदियों के पवित्र जल को मीलों की दूरी तय करके लाते हैं. इसी जल से शिव जी का जलाभिषेक किया जाता है. इस तरह की तपस्या और बलिदान द्वारा देवों के देव महादेव को खुश करने का हर संभव प्रयास किया जाता है.

कन्याएं और विवाहित महिलाएं सावन सोमवार (Sawan Somvar) का व्रत रखती हैं. विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए सावन के सोमवार का व्रत रखती हैं. जबकि कन्याएं भगवान शिव की तरह अच्छे वर पाने के लिए इस महीने (Sawan Ka Mahina) के सोमवार का व्रत रखती हैं. सावन के महीने में शिव-पार्वती की पूजा करने से विवाह संबंधी दोष दूर होते हैं.

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