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Sawan Somwar in Hindi: सावन सोमवारी व्रत का महत्व, पूजा विधी और पौराणिक कथा

सावन के सोमवार को सौभाग्यशाली माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि सोमवार व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. (Sawan Somwar in Hindi)

धार्मिक दृष्टि से सावन का महीना भगवान शिव के लिए बहुत खास होता है. यह महीना उनका सबसे प्रिय महीना है. इस वर्ष सावन का महीना 25 जुलाई से 22 अगस्त तक रहेगा. सावन का पहला सोमवार 26 जुलाई को पड़ रहा है और इस बार सावन का महीना 29 दिनों का है. इन 29 दिनों में 4 सोमवार (Sawan Somwar in Hindi) पड़ रहे हैं. इस महीने में पड़ने वाले सोमवार व्रत का भी विशेष महत्व होता है. सावन महीने के सोमवार को बहुत ही सौभाग्यशाली एवं फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि सावन का सोमवार व्रत मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है. कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

Sawan Somwar in Hindi

आइए जानते हैं सावन सोमवार व्रत की तारीख और पूजा विधि – Sawan Somwar in Hindi

सावन का पहला सोमवार – 26 जुलाई 

सावन का दूसरा सोमवार – 02 अगस्त

सावन का तीसरा सोमवार – 09 अगस्त

सावन का चौथा सोमवार – 16 अगस्त

सावन सोमवार व्रत करने की विधि

  • सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.
  • इसके बाद शिव मंदिर में भगवान शिव जी का जलाभिषेक करें.
  • शिव जी की पूजा करते वक्त माता पार्वती और नंदी को भी गंगाजल या दूध चढ़ाएं.
  • पंचामृत से रुद्राभिषेक करें और बेलपत्र भी अर्पित करें.
  • शिवलिंग पर धतूरा, भांग, चंदन, चावन चढ़ाएं और तिलक लगाएं.
  • भगवान शिव जी को प्रसाद के रूप में घी शक्कर का भोग लगाएं.
  • इसके बाद धूप, दीप से भगवान गणेश जी की आरती करें.
  • सबसे अंत में शिव जी की आरती करके फिर प्रसाद वितरण करें.

इसे भी पढ़ें:  शिवजी के लिए सावन का महीना क्यूं है खास?

सावन सोमवार के व्रत का नियमSawan Somwar in Hindi

  • भगवान शिव की पूजा में कभी भी केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से भगवान शिव नाराज हो जाते हैं.
  • तुलसी को भी कभी भी भगवान शिव को अर्पित नहीं करना चाहिए.
  • शिवलिंग पर कभी भी नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए.
  • भगवान शिव शंकर को हमेशा कांस्य और पीतल के बर्तन से ही जल चढ़ाना चाहिए.

सावन माह से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन से जो हलाहल विष निकला था उसे कैलाशपति भगवान शिव ने पी लिया था. इस विष के प्रभाव से शिव जी का शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो गया था और इससे उन्हें परेशानी होने लगी थी देवाधिदेव बाबा भोलेनाथ को इस परेशानी से बाहर निकालने के लिए इंद्रदेव ने जमकर वर्षा की थी. कहा जाता है कि यह घटनाक्रम सावन के महीने में ही हुआ था और शिव जी ने विषपान करके सृष्टि की रक्षा की थी. तभी से ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने (Sawan Somwar in Hindi) में शिव जी अपने भक्तों का कष्ट तुरंत ही दूर कर देते हैं.

स्कंद पुराण की एक कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि देवी सती ने हर जन्म में भगवान शिव को पति के रूप में पाने का प्रण लिया था. उन्होंने पिता के खिलाफ होकर शिव जी से विवाह किया था  लेकिन पिता द्वारा शिव जी को अपमानित करने पर उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया था. इसके बाद माता सती ने ही हिमालय और नैना की पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया था.

पौराणिक कथा

इस जन्म में भी उन्होंने शिव जी से विवाह के लिए सावन महीने में निराहार रहते हुए कठोर व्रत किया. इससे भगवान शिव प्रसन्न हो गए और माता पार्वती से उन्होंने विवाह किया. भगवान शिव की कृपा के लिए सावन महीने से ही सोलह सोमवार का उपवास आरंभ किया जाता है. सावन में 16 सोमवार व्रत का संकल्प लेना सबसे उत्तम माना जाता है. औघड़दानी शिव जी की प्रसन्नता और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से सोमवार व्रत रखा जाता है.

एक और पौराणिक कथा के अनुसार एक बार एक सुंदर कन्या अपनी खूबसूरती के अभिमान में ऋंगार करके एक ऐसे स्थान पर पहुंची जहां, ऋषिगण भोलेनाथ की पूजा के लिए जा रहे थे. कन्या ने अपने सौंदर्य से इन ऋषयों को शिव की पूजा से विमुख करने की कोशिश की. लेकिन अपने तपोबल से ऋषियों ने उसकी बुद्धि को परिवर्तित करके उसके मन को भी भक्ति मार्ग पर ला दिया. इसके बाद उस कन्या ने अपने पापों के प्रायश्चित के लिए ऋषियों से उपाय पूछा. ऋषियों ने कहा कि तुमने अपने 16 ऋंगारों के बल पर हमारा धर्म भ्रष्ट करने का पाप किया है. इस पाप से मुक्ति के लिए तुम्हें काशी में निवास करना होगा और वहां 16 सोमवार (Sawan Somwar in Hindi) का व्रत करने पर तुम पाप मुक्त हो जाओगी.  

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