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इस महाराजा के साथ थे लता मंगेशकर के अफेयर!

लता मंगेशकर व डोंगरपुर के महाराजा राजसिंह के बीच अफेयर था. इनकी शादी नहीं होने पर दोनों ने ही अविवाहित रहने का निर्णय लिया.Lata Mangeshkar love story

सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर का नाम लेते ही मन में सम्मान की भावना आ जाती है. वह संगीत और सादगी का पर्याय (Lata Mangeshkar love story) हैं. मीठा गाने के साथ वह अपने आस-पास के लोगों को हमेशा बड़ी बहन सा प्यार भी देती हैं.

lata mangeshkar

फिल्म इंडस्ट्री में आज भी लोग मानों इस महान व्यक्तित्व को देवी की तरह पूजते हैं. चार भाई-बहनों में लता मंगेशकर सबसे बड़ी बहन थीं. अपने छोटे भाई-बहनों के साथ उनका बहुत ज्यादा ही स्नेह रहा. भाई-बहनों को उन्होंने कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी.

लता जी कहती हैं कि उनके ऊपर पूरे घर की जिम्मेदारी थी इसीलिए उन्होंने कभी शादी नहीं की. भले ही वह अपनी जुबां से कुछ ना कहें लेकिन उनके शादी नहीं करने के इरादे के पीछे की सच्चाई कुछ और है. बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि सुरों के दुनियां की रानी लता मंगेशकर का एक महाराजा के साथ लंबे समय तक अफेयर था.

इसकी चर्चा इंडस्ट्री में काफी दिनों तक थी. अपनी लव स्टोरी (Lata Mangeshkar love story) के बारे में लता ने खुद से कभी कुछ नहीं कहा. लेकिन उनके जानकारों की तरफ से इसके बारे में खुलासा किया गया था. लता की राजसिंह के साथ मुलाकात उस वक्त हुई थी जब राज लॉ करने मुंबई आए थे.

तब वे लता के भाई हृदयनाथ के साथ इनके घर हमेशा आया करते थे. धीरे-धीरे राज का इनके घर पर आने का सिलसिला बढ़ता गया. और फिर राज व लता के बीच भी गहरी दोस्ती हो गई. यह दोस्ती देखते ही देखते प्यार में बदल गई.

मीडिया में आने लगे थे लता के अफेयर के चर्चे

ऐसा होने तक लता काफी प्रसिद्ध हो चुकी थीं. उनका नाम चर्चित हस्तियों में गिना जाने लगा था और लोग लता मंगेशकर को पहचानने लगे थे. जिसकी वजह से लता व राज के बीच गहराए इस रिश्ते (Lata Mangeshkar love story) की खबरें मीडिया में भी आने लगी थी. राज तीन भाई थे और वे सबसे छेटे थे. लता जी से राज 6 साल के बड़े थे.

वे दोनों शादी करना चाहते थे लेकिन ये शादी नहीं हो सकी. शादी नहीं होने के पीछे भी एक रोचक तथ्य है. इसके पीछे मान-सम्मान की बात आ गई थी. कहा जाता है कि राज ने अपने माता-पिता से वादा कर रखा था कि वे किसी आम घर की लड़की को उनके घर की बहू नहीं बनाएंगे.मरते दम तक राज ने अपना ये वादा निभाया भी.

राज और लता दोनों ने ही जीवनभर अविवाहित रहने का निर्णय लिया. राज को क्रिकेट बहुत पसंद था. वे क्रिकेट के बहुत शौकिन थे. जिसकी वजह से वे कई वर्षों तक बीसीसीआई के साथ जुड़े रहे. लता को भी क्रिकेट से प्रेम था. इन दोनों को मिलाने में क्रिकेट का भी बड़ा योगदान रहा है. एक बार क्रिकेट खेलने के बाद राज को लता के घर चाय के लिए बुलाया गया था.

राज के रिकार्डर में हमेशा रहते थे लता के गाने

इसी मुलाकात में राज ने लता को पहली बार देखा था. इसी दिनों के बीच बातचीत हुई और दोनों की दोस्ती हो गई थी. कहा जाता है कि राज के जेब में हमेशा टेप रिकार्डर रहता था. इस रिकार्डर में हमेशा लता के चुनिंदा गाने रहते थे. जब भी उन्हें मौका मिलता वो लता का गाना सुनना शुरू कर देते.

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राज सिंह लता जी को प्यार से मिट्ठू पुकारा (Lata Mangeshkar love story) करते थे. महाराज राजसिंह का जन्म 19 दिसंबर 1935 को राजपूताना के डूंगरपुर राजघराने में हुआ था. वो डूंगरपुर के महाराजा लक्ष्मण सिंह के तीन बेटों में सबसे छोटे थे. उनकी तीन बहनों में से एक बीकानेर की महारानी थीं.

बता दें कि 12 सितंबर 2009 को राजसिंह का देहांत हो चुका है. भूपेन हजारिका की पत्नी प्रियंवदा पटेल ने वर्ष 2012 में लता मंगेशकर पर आरोप लगाया था कि उनका भूपेन के साथ भी अफेयर (Lata Mangeshkar love story) था. जबकि लता मंगेशकर ने इस बारे में कभी कोई बयान नहीं दिया.

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सुरों की मल्लिका लता 28 सितंबर को अपना 90वां जन्मदिन मनाएंगी. 28 सितंबर को इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर की आवाज का तो हर कोई दिवाना है.

…और हमेशा के लिए छोड़ दिया स्कूल

बहुत कम लोग जानते हैं कि लता ने कुछ ही दिन स्कूल में पढ़ाई की थी. 5 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने स्कूल को त्याग दिया था. यहां तक की उन्होंने स्कूल में 1 कक्षा तक भी पढ़ाई नहीं की है. उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई घर पर की थी. इस बारे में कहानी है कि जब कोल्हापुर के आगे सांगली में 5 वर्ष की उम्र में दीदी स्कूल जाती थी, तो उनकी बहन आशा भी उनका हाथ पकड़कर स्कूल जाती थी.

8 दिन बाद शिक्षक ने लता से कहा कि एक लड़की की फीस में दो लड़कियां बैठेंगी क्या, जाओ इसे घर छोड़ कर आओ. बस यह सुनते ही लता व आशा दोनों बहनें रोते हुए घर वापस लौट आईं. उसी दिन से लता ने स्कूल जाना बंद कर दिया. इंडस्ट्री में अब वह लता दीदी के नाम से मशहूर हो चुकी हैं. यह उपाधि उन्हें कब मिली किसी को नहीं पता. #LataMangeshkar

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