Home Plays and Toys खेल में बड़ों की भागीदारी से बच्चे का होता है कौशल विकास!

खेल में बड़ों की भागीदारी से बच्चे का होता है कौशल विकास!

सिर्फ किताबी ज्ञान से बच्चे को बेहतर इंसान नहीं बनाया जा सकता है. इसके लिए खेल-कूद भी जरूरी है और खेल में बड़ों की भागीदारी बच्चों के कौशल विकास में फायदेमंद साबित होता है.

बच्चों में शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ किताबी ज्ञान होना ही सही नहीं है. बच्चे में सोचने, समझने व सही-गलत की पहचान करने की भी शक्ति का होना जरूरी है. अगर बच्चे में इन चीजों की कमी होगी तो वह लाइफ में सही वक्त पर सही निर्णय नहीं ले पाएगा. अब सवाल है कि इन तमाम कौशल का विकास (Skill development) क्या सिर्फ स्कूल या घर की चार दिवारी के अंदर हो सकता है? बच्चों में इन क्षमताओं के विकास के लिए जरूरी है सही अवसर प्रदान करने की.

Best Game for kids
source: nurtureandthriveblog

खेल-खेल में कौशल विकास से संबंधी कुछ जानकारियां साझा करना जरूरी हैः

खेल-खेल में कौशल विकास (Skill Development in Sports):

बच्चों में कौशल विकास (Skill development) में खेल काफी महत्वपूर्ण है. जैसे बच्चा जब कोई खेल, खेल रहा होता है तो पहले वह अपना लक्ष्य तैयार करता है. लक्ष्य प्राप्त करने के लिए योजना तैयार करता है. इसके बाद खेल की रणनीति व उस पर अमल करने के तरीके पर विचार-विमर्श करता है. इसी में पता चलता है कि बच्चा एक खेल को किस तरह विभिन्न मुद्दों से जोड़कर देखता है. फिर जब वह खेलता है तो खेल में वह सामाजिक और व्यावहारिक परिदृश्य को जान पाता है.

साफ है कि खेलने के दौरान बच्चे की सोचने-समझने की शक्ति का विकास होता है. बच्चे खेलते वक्त टीम के सदस्यों के साथ दोस्ती बनाए रखते हैं. टीम के सदस्यों के प्रति उनके अंदर अपनापन की भावना आती है. इसी तरह किसी विषय पर निर्णय लेना भी क्लास के अंदर सीखने वाला ज्ञान नहीं है. यह भी बाहरी गतिविधियों से ही सीखा जा सकता है. खेल के दौरान यह देखना जरूरी है कि बच्चे का उस खेल के प्रति कितना लगाव है. भावना जितनी सकारात्मक होगी बच्चे का कौशल विकास उतना ही ज्यादा होगा.

playing with friends
source: cloudfront

कैसे सीखेंगे बच्चे (How to learn children)?

खेलने के दौरान बच्चे का कौशल विकास (Skill development) होता है यह तो सही बात है. जबकि अभी परिस्थितियां विपरीत है. आजकल के बच्चे तो खेलते-खेलते ही अचानक लड़ाई-झगड़े पर उतारू हो जाते हैं. मारपीट तक की भी स्थिति आ जाती है. जबकि कौशल विकास के लिए बच्चों में सकारात्मक व सौहार्द की भावना का होना बेहद महत्वपूर्ण है. पर सच्चाई तो यह है कि खेल में बड़ों की भूमिका से भी बच्चे प्रभावित होते हैं.

इसलिए बच्चों के साथ खेल में बड़ों का भी योदगान जरूरी है. खेल के दौरान अगर बच्चे किसी विषय को लेकर झगड़ना शुरू कर देते हैं तो ऐसे में उन्हें समझाकर फिर से स्थिति को सामान्य करने में उन्हें आपकी मदद मिल सकती है.

खेल पर ऐसे करें बात (Such thing on the game):

कोई भी खेल खेलने के बाद सभी बच्चों के साथ बैठकर बातचीत किया जा सकता है. इस दौरान बच्चों के साथ कुछ अहम बातों पर चर्चा होनी चाहिए. जैसे हम सभी ने कौन-कौन सा गेम खेला? सभी बच्चे से पूछें कि खलते वक्त आपको खेल में सबसे अच्छी बात क्या लगी?

उनके साथियों के बारे में पूछें कि खेल के दौरान आपको किसका-किसका व्यवहार पसंद आया और किसका नहीं? खेलने के दौरान आपकी टीम के सदस्यों के बारे में क्या भावना थी? खेलने से पहले आप कैसा अनुभव कर रहे थे? अभी आप सभी कैसा अनुभव कर रहे हैं? सामूहिक रूप से सबकी राय लेने पर खेल संबंधी किसी निर्णय पर पहुंचा जा सकता है.

conversation with child
source: cheatsheet

इस तरह के संवाद में कोई भी शामिल हो सकता है. जैसे माता-पिता, शिक्षक, बड़े भाई-बहन या कोई अन्य बड़ा व्यक्ति अगर बच्चे के साथ संवाद करें तो हम बच्चों में जीवन से संबंधित विभिन्न तरह के कौशल विकास (Skill development) कर सकते हैं. जिससे बच्चे किसी विषय पर सोच-विचार व तर्क करके सही गलत की पहचान करते हुए कोई निर्णय ले सके.

स्कूल का भी योगदान (School also contributed):

स्कूल में शिक्षकों को बच्चे की पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी भागीदारी लेनी चाहिए. खेल के माध्यम से बच्चों में साफ-सफाई के प्रति भी जागरुकता बढ़ाई जा सकती है. साफ परिवेश में बच्चों में सकारात्मक भावना विकसित होती है. इसका प्रभाव बच्चे की पढ़ाई पर भी दिखता है और वे पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान लगाते हैं.

शिक्षक अगर बच्चों के साथ खेल में शामिल होते हैं तो इनके बीच की दूरियां कम होने लगती है. साथ में खेलते-खेलते उनमें शिक्षकों के प्रति स्नेह की भावना विकसित होती है. टीम मेंबर की तरह साथ में खेलने पर शिक्षक की बातों का असर बच्चों पर जल्दी पड़ने लगता है. ऐसे में शिक्षक बच्चे की बातों को सहजता से मान लेते हैं. इसलिए विद्यालयों में समय-समय पर विभिन्न तरह के खेल का आयोजन होते रहना चाहिए. इससे शिक्षकों की भागीदारी से बच्चों में सकारात्मक भावना का विकास होता है.

यह भी (This Also)…

खेल गतिविधियों से बच्चों में शिक्षकों के प्रति भय कम होगी. ऐसे में शिक्षक बच्चों को किसी भी विषय को सहजता से समझाने में सक्षम हो पाएंगे. साथ ही शिक्षक बच्चों की विभिन्न क्षमताओं को रेखांकित कर उसे महत्व दे पाएंगे. क्षमताओं के प्रति सजगता से बच्चे पढ़ाई के प्रति प्रेरित होंगे. साथ ही बच्चे के सामने स्पष्ट लक्ष्य रखने एवं उसे पाने में भी मददगार साबित होती है.

playing is beneficial for child
source: amazonaws

बच्चे के लिए पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद भी बहुत जरूरी है. सिर्फ किताबी ज्ञान से एक बेहतर व्यक्तित्व का निर्माण करना संभव नहीं है. पर यह भी जरूरी है कि बच्चों के साथ खेल में बड़ों की अगर भागीदारी होगी तो इसका परिणाम बेहतर होगा. यहां हमने आपको खेल में माध्यम से बच्चों में कौशल विकास कौशल विकास (Skill development) बढ़ाने की जानकार दी. इसको अगर आप लागू करते हैं तो यह आपके लिए भी फायदेमंद होगा. ‘योदादी’ के साथ अपने अनुभव को कमेंट कर जरूर शेयर करें. #हैप्पीपैरेंटिंग

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here