Spinal Muscular Atrophy in Hindi: कितनी खतरनाक है स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक तरह की जानलेवा बीमारी है जो खासकर शिशुओं और बच्चों को ही प्रभावित करती है. (Spinal Muscular Atrophy in Hindi)

    कई ऐसी बीमारियां हैं जिसके बारे में लोगों को जानकारी नहीं है लेकिन ये बीमारियां होती बहुत खतरनाक है. इन्हीं बीमारियों में से एक है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy in Hindi). यह एक अनुवांशिक बीमारी है. यह बीमारी भी कई प्रकार की होती है,  लेकिन इसमें टाइप-1 सबसे गंभीर है. एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में हर साल जन्म लेने वाले बच्चों में करीब 400 बच्चे इस बीमारी से ग्रसित होते हैं. सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि भारत में भी इसके कई सारे मामले सामने आ चुके हैं. इस बीमारी का इलाज सिर्फ अमेरिका में ही है.

    Spinal Muscular Atrophy in Hindi

    अभी हाल ही में बिहार के अयांश नामक एक बच्चे में यह दुर्लभ बीमारी पाई गई है. उसे स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी टाइप-1 है. यह दुर्लभ बीमारी जो कि 8 हजार बच्चों में से किसी एक को ही होती है और इसका इलाज भी सिर्फ एक ही है. इस बीमारी के इलाज के लिए 16 करोड़ का इंजेक्शन चाहिए जो अमेरिका में मिलता है. इसके पहले भी भारत में स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी टाइप-1 के कई मामले में सामने आ चुके हैं.

    कितनी गंभीर है यह बीमारी (Spinal Muscular Atrophy in Hindi)

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी ज्यादातर शिशुओं और बच्चों को प्रभावित करती है. इस बीमारी में बच्चे की मांसपेशियां सही तरीके से कार्य नहीं कर पाती है. इसमें जीन शरीर में तंत्रिका तंत्र के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक प्रोटीन के निर्माण में बाधा स्थापित करता है. इस बाधा की वजह से तंत्रिका तंत्र नष्ट हो जाता है और पीड़ित बच्चे की मौत तक हो जाती है. दरअसल यह एक ऐसी दुर्लभ बीमारी है जो मांसपेशियों को खराब कर देती है. बीमारी के गंभीर होने के बाद बच्चे की दो साल की उम्र से पहले ही मौत हो जाती है.

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    बीमारी के लक्षण

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-1 से पीड़ित बच्चे की मांसपेशियां (Spinal Muscular Atrophy in Hindi) कमजोर होती हैं. धीरे-धीरे उनके शरीर में पानी की कमी होने लगती है साथ ही स्तनपान करने और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. इस बीमारी से पीड़ित बच्चे की मांसपेशियां इतनी ज्यादा कमजोर हो जाती हैं कि वे हिलने-डुलने लायक भी नहीं रहते. स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से ग्रसीत बच्चे धीरे-धीरे इतने अक्षम हो जाते हैं कि सांस लेने के लिए उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है. लेकिन बच्चे को ज्यादा समय तक वेंटिलेटर पर भी रखना संभव नहीं होता है क्योंकि इससे ट्यूब में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है.

    बीमारी का इलाज

    इस गंभीर बीमारी के इलाज के लिए (Spinal Muscular Atrophy in Hindi) एक खास इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है, जो अमेरिका से मंगाया जाता है. लेकिन यह इंजेक्शन इतनी महंगी है कि हर किसी का इलाज संभव नहीं हो पाता है. इस इंजेक्शन के लगने के बाद बच्चे की मांसपेशियों को कमजोर कर उन्हें हिलने-डुलने और सांस लेने में समस्या पैदा करने वाले जीन निष्क्रिय हो जाते हैं यानी यह तंत्रिका कोशिकाओं के लिए जरूरी प्रोटीन का उत्पादन शुरू कर देता है. इस इंजेक्शन के लगने के बाद बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास सामान्य रूप से होता है.

    कैसे होती है यह बीमारी (Spinal Muscular Atrophy in Hindi)

    यह खतरनाक बीमारी परिवार के सदस्यों से होते हुए बच्चे में हो जाती है. यदि आपके बच्चे को यह बीमारी है तो सकी जीन में खराबी है. बच्चे में अगर किसी एक का खराब जीन जाता है तो उसे यह बीमारी नहीं होगी लेकिन वो इससे संक्रमित हो जाएगा. सिर्फ इतना ही नहीं यह जीन भविष्य में आपके बच्चे से होते हुए उसके बच्चे में भी जा सकता है. दुर्लभ स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी बीमारी का पता लगाना थोड़ा मुश्किल काम है क्योंकि इसके लक्षण अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं.

    इसके लक्षणों का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपसे बच्चे के बारे में पूछताछ करेंगे. जैसे क्या आपके बच्चे को सिर उठाने या फिर किसी भी तरफ मुड़ने में दिक्कत होती है? क्या आपके बच्चे को खुद से खड़े होने या बैठने में परेशानी होती है? क्या आपके बच्चे को सांस लेने में परेशानी होती है? क्या आपके परिवार में पहले किसी भी सदस्य में इस तरह के लक्षण दिखने को मिले हैं? अब तक इस बीमारी का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है क्योंकि यह एक अनुवांशिक बीमारी है.

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