Home Education युवाओं के लिए आज भी प्रेरणादायी है विवेकानंद के विचार!

युवाओं के लिए आज भी प्रेरणादायी है विवेकानंद के विचार!

आज के युवा आधुनिकता की चकाचौंध में खोते जा रहे हैं. आधुनिकता से प्रभावित होकर उनके राह बदल रहे हैं. धन-दौलत व ऐश्वर्य का जीवन ही उनका आदर्श बनता जा रहा है.

युवा ही किसी समाज व देश की नींव होते हैं. युवा शक्ति में इतनी ताकत है कि वे चाहे तो देश को बुलंदियों तक पहुंचा दें. साफ शब्दों में इन्हें देश की रीढ़ की हड्डी भी कह सकते हैं क्योंकि यही युवा देश की प्रगति के आधार हैं और समाज का विकास उन्हीं पर टिका है. इन महत्वाकांक्षी, ऊर्जावान युवाओं के अंदर कुछ भी कर गुजरने का जज्बा होता है.

समाज व राष्ट्र निर्माण में युवाओं का योगदान ही सर्वाधिक होता है. पर आज स्थिति विपरीत है क्योंकि युवाओं के अंदर नकारात्मकता घर कर रही है. किसी कार्य को करते वक्त उनमें धैर्य की कमी की वजह से वे जल्द से जल्द सफलता पाना चाहते हैं. अपनी सफलता के लिए जरा भी इंतजार करना उन्हें पसंद नहीं. वे भविष्य में आगे तो बढ़ना चाहते हैं पर इसके लिए परिश्रम नहीं करना चाहते बल्कि किसी भी तरह शॉर्टकट माध्यम से वे आगे बढ़ना चाहते हैं.

Swami Vivekananda
स्वामी विवेकानंद | vifindia

आज के युवा आधुनिकता की चकाचौंध में खोते जा रहे हैं. आधुनिकता से प्रभावित होकर उनके राह बदल रहे हैं. धन-दौलत व ऐश्वर्य का जीवन ही उनका आदर्श बनता जा रहा है. पर बगैर कठोर परिश्रम के जल्द से जल्द ये हसरतें पूरी नहीं होने पर वे मानसिक रूप से तनाव में आ जाते हैं. फिर धीरे-धीरे वे अपने जीवन से हार मान जाते हैं. ऐसे नकारात्मक सोच वाले युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है.

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उन्होंने ही अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व कर इसे सार्वभौमिक पहचान दिलाई थी. स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस के अवसर पर 12 जनवरी 1985 से हर वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस का पालन किया जाता है. युवा दिवस के रूप में स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन चुनने के पीछे सरकार की मान्यता थी कि स्वामी विवेकानंद के विचार व उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत होगा. पूरे देश में इस दिन का पालन बड़े उत्साह के साथ किया जाता है.

Swami Vivekananda
स्वामी जी में ऊर्जा के अपार स्रोत हैं। | ddnews

स्वामी जी में ऊर्जा के अपार स्रोत हैं। जानते हैं उनके कुछ प्रेरणादायी वचन…

  • ‘उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए.’
  • ‘उठो मेरे शेरों, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो.’
  • ‘जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न धाराएं अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक जाता है.’
  • ‘हमारा कर्तव्य है कि हम हर किसी को उसका उच्चतम आदर्श जीवन जीने के संघर्ष में प्रोत्साहन करें, और साथ ही साथ उस आदर्श को सत्य के जितना निकट हो सके लाने का प्रयास करें.’
  • ‘अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाए उतना बेहतर है.’
  • ‘तुम्हें अन्दर से बाहर की तरफ विकसित होना है. कोई तुम्हें पढ़ा नहीं सकता, कोई तुम्हे आध्यात्मिक नहीं बना सकता. तुम्हारी आत्मा के अलावा कोई और गुरु नहीं है.’

विचार से ही है जीवन

  • ‘भला हम भगवान को खोजने कहां जा सकते हैं अगर उसे अपने ह्रदय और हर एक जीवित प्राणी में नहीं देख सकते.’
  • ‘सच्ची सफलता और आनंद का सबसे बड़ा रहस्य यह है: वह पुरुष या स्त्री जो बदले में कुछ नहीं मांगता, पूर्ण रूप से निःस्वार्थ व्यक्ति, सबसे सफल है.’
  • ‘एक विचार लो, उस विचार को अपना जीवन बना लो – उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार को जियो. अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो. यही सफल होने का तरीका है.’
Vivekananda Smarak
स्वामी विवेकानंद की बातें आकर्षित करती थीं. | fineartamerica

स्वामी विवेकानंद की बातों को लोग ध्यान से सुनते थे और उनकी बातें बेहद प्रभावशाली भी होती थी. उनके द्वारा दिया गया ज्ञान उनके जीवन के अनुभव पर आधारित होती थी. इसी कारणवश उनके ज्ञान लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती थी और लोगों पर इसका प्रभाव भी पड़ता था. आज के युवा वर्ग भी विवेकानंद की कुछ बातों पर अमल करके सफलता की बुलंदियां छू सकते हैं.

> डर के आगे जीत हैः

युवाओं के लिए अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद हमेशा यही कहते थे कि डर के आगे जीत है. अगर आपके सामने कभी कोई मुसीबत आ जाए तो उससे घबराकर भागने के बजाय आप उसका डट कर सामना कीजिए, जीत जरूर हासिल होगी.

> संसार में माँ ही सर्वोपरि हैः

स्वामी विवेकानंद हमेशा कहते थे कि इस संसार में माँ से बढ़कर कुछ हो ही नहीं सकता. माँ ही होती है जो निःस्वार्थ भाव से अपने बच्चे को नौ महीने तक पेट में खुशी-खुशी रखती है. इस बोझ को ढ़ोने में उसे परेशानी भी हो तो वह खुशी मन से उसे सह लेती है.

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> लक्ष्य पर ध्यान रहना भी जरूरीः

आज के युवा सिर्फ डिग्रियों के पीछे भागते रहते हैं. यही वजह है कि या तो वे सफल नहीं होते और अगर हो भी गए तो काफी देर हो चुकी होती है. ऐसे युवाओं के लिए स्वामी जी का कहना था कि लक्ष्य पर सिर्फ नजर ही नहीं बल्कि ध्यान भी होना जरूरी है. अन्यथा आपको सफलता की प्राप्ति नहीं होगी.

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स्वामी विवेकानंद हमेशा चरित्र निर्माण पर जोर देते थे. | blogspot

> देने में जो आनंद है किसी और में नहीः

वर्तमान समय में लोग सिर्फ अपने लाभ-हानि की सोचते हैं और सभी अपने मुनाफे की कोशिश में लगे हुए हैं. यही वजह है कि किसी के पास अपार धन-संपत्ति है तो कोई गरीबी, भुखमरी का शिकार है. स्वामी विवेकानंद हमेशा कहते थे कि जो सुख किसी को देने में है वह सुख किसी अन्य कार्य में नहीं.

> हमारा चरित्र ही हमारी संस्कृति हैः

स्वामी विवेकानंद हमेशा चरित्र निर्माण पर जोर देते थे. उनका मानना था कि अच्छे चरित्र से ही देश की संस्कृति का निर्माण होगा. पर आज परिस्थितियां विपरीत है. लोग बेहतर चरित्र पर ध्यान देने के बजाय अपने लुक पर ज्यादा ध्यान देते हैं.

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