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नवजात शिशु की सेहत का ऐसे रखें ख्याल

नवजात बच्चे के लिए कुछ भी करने से पहले यह सोच लेना जरूरी होता है कि क्या उसके सही है और क्या गलत.

माता-पिता अपने नवजात शिशु की सेहत को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं और इसके लिए वे अपनी तरफ से पूरी कोशिश भी करते हैं. बच्चे की देखभाल के लिए अधिक से अधिक सतर्कता की आवश्यकता भी होती है. नवजात शिशु का शरीर संवेदनशील होता है और आपकी जरा सी भी लापरवाही शिशु के लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकती है.

नवजात बच्चे के लिए कुछ भी करने से पहले यह सोच लेना जरूरी होता है कि क्या उसके सही है और क्या गलत. रोजाना की जीवनचर्या में माता-पिता को अपने नवजात के लिए अलग से वक्त निकालने की जरूरत पड़ती है. जन्म लेते ही शिशु की देखभाल बहुत सावधानी से की जानी चाहिए. हम जानते हैं कि आप अपने शिशु की सबसे अच्छी देखभाल करना चाहते हैं. यह जानना एक अद्भुत अनुभव कि आप एक स्वस्थ और खुश शिशु को पाल रहे हैं. तो बस कुछ बिंदुओं की मदद से आज हम आपको बताएंगे नवजात की देखभाल करने के महत्वपूर्ण तरीक के बारे में.

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सर्वप्रथम नवजात शिशु के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं है. बच्चे को पहले छः महीने तक मां का दूध पिलाना बहुत जरूरी होता है.

मां के दूध से बच्चों की हड्डियां मजबूत होने के साथ ही उनके शरीर का विकास अच्छे से होता है. फैशन के इस दौर में तो मां का अपने बच्चे को दूध पिलाने का चलन ही मानो समाप्ति की राह पर है जो कि बिल्कुल गलत है.

यह बेहद महत्वपूर्ण बात है कि नवजात शिशु के शरीर के अंग बहुत कमजोर होते है और उसके प्रति विशेष सतर्कता रहती है. ध्यान रखें कि नवजात को उठाते समय या सुलाते समय उनकी गर्दन के पीछे हाथ जरूर रखें. खेल-खेल में नवजात बच्चों को कभी ना हिलाएं. ऐसा करने से उसके मस्तिष्कह में रक्त स्राव हो सकता है जो कभी-कभी जानलेवा भी साबित होता है.

शिशु का रोना भी एक अच्छा अभ्यास है. जरूरी नहीं कि बच्चा अगर रो रहा है तो उसे कोई तकलीफ है. उसके रोने पर उसे मारें या डांटें नहीं बल्कि उसे प्यार से चुप कराएं. पर हां इसके बाद भी अगर बच्चा चुप ना हो तो फिर डॉक्टर को जरूर दिखाएं. सामान्यतः देखा जाता है कि बच्चे के पेट में या फिर कान में तकलीफ होने पर भी वे रोते हैं.

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हालांकि छोटे शिशु बहुत साफ होते हैं लेकिन फिर भी उन्हें गुनगुने सादे पानी से स्नान कराना उनके लिए बहुत आनंददायक होता है. चूंकि उनकी त्वचा बहुत नाजुक होती है इसलिए शुरुआती कुछ हफ्तों तक शैम्पू का इस्तेमाल ना करें. इस बात की सलाह दी जाती है कि शिशु को मुलायम तौलिए या मुलायम बेबी वाइप से पोछें और उनकी कोमल त्वचा को रगड़ें नहीं. पहले वर्ष में साबुन के इस्तेमाल की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि यह चिपचिपा होने की वजह से त्वचा के छिद्रों को बंद कर देता है.

नवजात बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर पर ही भोजन देना चाहिए और यदि आप शिशु के खाने की बारंबारता से चिंतित हैं, तो इस बारे में चिंतित न हों क्योंकि यह बिल्कुल सामान्य है. चूंकि इस समय शिशु का पेट काफी छोटा होता है, इसलिए थोड़ी-थोड़ी देर पर थोड़ा-थोड़ा भोजन देना जरूरी होता है.

आप यह भी नोटिस करेंगे कि पहले तीन महीनों में आपके शिशु के सोने का तरीका आपके सोने के तरीके से बिल्कुल भिन्न है. आप यह भी देख सकते हैं कि आपका नन्हा शिशु पैदा होने के पहले दो हफ्तों तक नींद में रहना चाहता है और कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि खाने के दौरान भी वह सो जाए. तो इसमें चिंता करने वाली कोई बात नहीं है क्योंकि यह काफ़ी सामान्य स्थिति है. हालांकि तीसरे सप्ताह के बाद आपको लगातार एक पैर पर खड़ा रहना होगा क्योंकि इस दौरान आपका बच्चा अपेक्षाकृत अधिक बार जगता है.

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यह अवलोकन करके शुरू करें कि बच्चा कब सोता है और वह कितनी देर तक सोता है. अब अच्छा यह होगा कि आप अपने शिशु के सोने के पैटर्न के अनुसार अपनी नींद का पैटर्न बना लें. जब बच्चा सो रहा हो तो आप भी सोने की कोशिश करें और तब जग जाएं जब वह उठकर रोने लगे. इससे न केवल आपके शिशु की निगरानी होगी, बल्कि आपकी भी अच्छी नींद सुनिश्चित होगी.

जन्म के बाद 6 माह तक सिर्फ माँ के दूध पर पलने वाले बच्चे को निमोनिया कम होता है. निमोनिया से बचने हेतु कुछ टीके भी उपलब्ध हैं, जो लगवाना चाहिए. इनमें बीसीजी, एचआईवी, डीपीटी व न्यूमोकॉक्कल के टीके प्रमुख हैं. गर्भवती महिला की अच्छी देखभाल करने से जन्म लेने वाले बच्चे का वजन अच्छा रहता है. जन्म के समय बच्चे का वजन ढाई किलो से अधिक होना चाहिए. ऐसे बच्चों को निमोनिया होने का जोखिम न्यूनतम रहता है.

शिशु के नए कपड़े, कंबल और बेडशीट को धोया जाना अच्छा होता है. बिना रासायनिक वाले हल्के डिटर्जेंट का उपयोग सावधानी से करें. रसायनों, सुगंधों और रंगों का उपयोग करने वाले किसी भी कठोर उत्पाद से आपके शिशु की नाजुक त्वचा पर जलन, रैशेज, सूखापन, और एलर्जी हो सकती है. आपके शिशु को सबसे अधिक आपके प्यार, देखभाल और स्नेह की जरूरत होती है. ये ध्यान रखने योग्य बहुत ही सरल बिंदु हैं, है ना? ये मुख्य रूप से बस ऐसी बुनियादी जानकारी है जिसे आपको अपने शिशु की कोमल त्वचा से निपटने के दौरान ध्यान में रखने जरूरत है और यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके शिशु को किसी भी प्रकार की त्वचा समस्या का सामना न करना पड़े.

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एक शोध के मुताबिक बेबी पाउडर के छोटे कण आसानी से बच्चों के सांस में जा सकते हैं जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है और इसलिए बच्चे को पाउडर लगाने से बचा जाना चाहिए. इसकी बजाय त्वचा के चकत्ते या संक्रमण के लिए मेडिकली अनुशंसित क्रीम का उपयोग करना उचित होगा.

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