Home Education बच्चे को ऐसे सिखाएं हेल्दी कम्पीटिशन के गुण

बच्चे को ऐसे सिखाएं हेल्दी कम्पीटिशन के गुण

आज का युग प्रतियोगिता भरा है. घर से लेकर बाहर तक बच्चे को इन प्रतियोगिताओं का सामना करना पड़ता है. Healthy Competition For Kids

आज का युग प्रतियोगिता भरा है. घर से लेकर बाहर तक बच्चे को इन प्रतियोगिताओं का सामना करना पड़ता है. बचपन में घर में भाई-बहनों के साथ, स्कूल में अपने साथियों के साथ और फिर बड़े होने के बाद ऑफिस में अपने कलीग्स के साथ इन्हें कई बार कम्पीटिशन (Healthy Competition For Kids) का सामना करना पड़ता है. यानि प्रतिस्पर्धा हमारे जीवन का ही एक हिस्सा है.

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इसे अगर सकारात्मक रूप से लिया जाए तो यह व्यक्ति में एक नहीं बल्कि कई तरह के गुणों का संचार करती है. प्रतिस्पर्धा किसी व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाने में मदद करती है. इसके विपरीत अगर प्रतिस्पर्धा को नकारात्मक रूप में लिया जाए तो यह जलन, तनाव व नकारात्मक सोच का कारण बन सकती है.

इसलिए जरूरी है कि आप बच्चे को शुरू से ही हेल्दी कंम्पीटिशन के बारे में बताएं और हर माता-पिता की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है. अब सवाल उठता है कि बच्चे के मन में प्रतिस्पर्धा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण कैसे विकसित किया जाए. ताकि वे हेल्दी कम्पीटिशन में हिस्सा ले सकें. तो आइए इस आलेख के माध्यम से आपके सवालों का जवाब देते हैं-

क्या है कम्पीटिशन – Healthy Competition For Kids

कम्पीटिशन को सकारात्मक रूप देने के लिए सबसे पहले आप अपने बच्चे को यह बताएं कि प्रतिस्पर्धा वास्तव में क्या है. सामान्य तौर पर देखा जाता है कि बच्चे एक दूसरे से या फिर बाहरी दुनिया से कम्पीटिशन करते हैं, जिसमें वे फेल हो जाते हैं. जिसकी वजह से बच्चों के मन में नकारात्मक सोच या जलन की भावना उत्पन्न होती है.

बेहतर होगा पहले ही बच्चे को समझाएं कि प्रतिस्पर्धा उनके स्वयं के लिए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए है. और लक्ष्य निर्धारित करने के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है तो इसके लिए खुद से प्रतिस्पर्धा करें. स्कूल में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि एक बच्चा कविता कम्पीटिशन में घबराहट कि वजह से सही से नहीं बोल पाता है, लेकिन दूसरे बच्चे के फर्स्ट आने पर उसके प्रति जलन की भावना नहीं होनी चाहिए.

अपने बच्चे को बताएं कि कम्पीटिशन यह है कि वह स्वयं के लिए एरक गोल सेट करे. इस गोल तक पहुंचने के लिए लगातार अभ्यास से वह कविता पाठ करना अच्छे से सीख जाए. ऐसे में वह खुद के लिए निर्धारित गोल को पूरा करता है तो उसे बाहरी दुनिया में कौन सा स्थान प्राप्त हुआ है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है.

हार और जीत के मायने समझाएं – Healthy Competition For Kids

आमतौर पर बच्चों के मन में यही भावना होती है कि अगर वह किसी कम्पीटिशन में भाग लेता है तो उसके लिए जीतना बहुत जरूरी है. अगर वो ऐसा नहीं कर पाते हैं तो मन में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होना शुरू हो जाता है. इसलिए एक माता-पिता होने के नाते आप बच्चे को हार और जीत के मायने अवश्य समझाएं.

बच्चे को समझाएं कि अगर उसने किसी कम्पीटिशन में भाग लिया है और प्रथम स्थान प्राप्त नहीं हुआ है तो इसका यह मतलब नहीं है कि बच्चे में कौशल नहीं है. कम्पीटिशन रिजल्ट से नहीं बल्कि उनके प्रयासों से निर्धारित होता है. बच्चे को बताएं कि अगर वह दिल से मेहनत करता है और उम्मीद के अनुसार परफॉर्म कर पाते हैं तो उसकी सच्ची जीत यही है. दूसरों से तुलना करने पर मन में नकारात्मकता की भावना बढ़ती है.

करें सेलिब्रेट – Healthy Competition For Kids

अक्सर लोग ऐसा करते हैं कि बच्चा जब किसी चीज में जीत हासिल करता है तो उसके लिए बड़े स्तर पर सेलिब्रेशन मनाया जाता है. लेकिन बच्चे की हार में माता-पिता उदास होकर बैठ जाते हैं. इससे बच्चे के मन में यह बात घर कर जाती है कि प्रतिस्पर्धी युग (Healthy Competition For Kids) में जीतना जरूरी है, चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े. इस भावना की वजह से बच्चे अनहेल्दी कम्पीटिशन की ओर बढ़ने लगते हैं. बेहतर होगा आप अपने स्वभाव में बच्चे के प्रयासों की सहारना करने और सेलिब्रेट करने की आदत को शांमिल करें.

अपने बच्चे के लिए अगर आप परीक्षा में 70 फीसद अंक लाने का गोल सेट करते हैं और बच्चा 75 फीसद अंक लेकर आया है लेकिन कक्षा में वह कोई पोजिशन होल्ड नहीं कर पाया. तो ऐसे में आप उदास होने की बजाय उसके प्रयासों और गोल्स को पूरा करने के लिए सेलिब्रेशन मनाएं. ऐसा करने पर बच्चे को एहसास होगा कि फर्स्ट आना ही सबकुछ नहीं है बल्कि सच्चे मन से किया गया प्रयास ही कम्पीटिशन को हेल्दी बनाता है.

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