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बच्चों को वर्णमाला सिखाने के आसान और रोचक तरीके

बच्चों को वर्णमाला किस तरह आसानी से सिखाया जा सकता है? वर्णमाला सिखाने के तरीके - Tips to teach kids alphabets

बच्चों को वर्णमाला किस तरह आसानी से सिखाया जा सकता है? इस तरह के सवाल से साफ है कि आप बच्चे को वर्णमाला रटाना नहीं बल्कि उसे समझाना चाहते हैं. ताकि बच्चे इसका सही इस्तेमाल कर सकें. क्यूंकि बगैर समझे इसे रटने वाले बच्चे पूरी वर्णमाला ही भूल जाते हैं और फिर आपकी शिकायत रहती है कि मैने अपने बच्चे को बड़ी मेहनत से वर्णमाला रटाया था और छुट्टियां पड़ते ही वह सारा भूल गया. इसलिए जरूरी है कि आप बच्चे को इसे सही तरीके से समझाकर ही सिखाएं.

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वर्णमाला सिखाने के तरीके – Tips to teach kids alphabets

बच्चे खुद से जो चीजें सीखते हैं, उसमें उनकी अवधारणाएं होती है और उसे वे कभी नही भूलते. इसलिए बेहतर होगा आप अपने बच्चे को वर्णों के साथ एक सार्थक रिश्ता बनाने का अवसर प्रदान करें. वर्णों के माध्यम से बच्चे को पढ़ना सिखाने के लिए आप एक-एक वर्ण की आकृति, उसस बनने वाले शब्द और उसकी आवाज से शुरुआत कर सकते हैं.

जैसे आपको देखना होगा कि पहली आवाज क्या है? इस आवाज को आप बच्चे के सामने वर्ण के रूप में रख सकते हैं. जब बच्चे विभिन्न शब्दों में आने वाला पहला वर्ण और पहली आवाज के रिश्ते को पहचानने लगते हैं, तो फिर आपका काम बहुत ही आसान हो जाएगा. और ऐसे में बच्चा वर्ण पहचानने लगेगा. 

क्या है शब्दों में इस्तेमाल का मौकाTips to teach kids alphabets

शुरु के दिनों में ऐसे वर्णों का चयन करें जो बार-बार इस्तेमाल किए जाते हैं. इस तरह के कई सारे वर्ण सिखाने के बाद आप बच्चे को आपस में शब्द बनाना और उसे पढ़ना सिखा सकते हैं, जैसे आ और म. इसके बाद आप आम पर आ सकते हैं. फिर आ और ए सिखाने के बाद आए की बात कर सकते हैं. इसके बाद ग,र,म सिखाने के बाद आप गरम शब्द पर आ सकते हैं. बच्चे को वर्णमाला सिखाते वक्त आप चित्रों का इस्तेमाल जरूर कीजिए.

निरर्थक शब्दों से भी बच्चों को पढ़ने और वर्णों की पहचान हो रही है कि नहीं इसकी जांच कर सकते हैं. इसकी वजह है कि ऐसे शब्दों को रटना असंभव है. इससे बच्चे जिन वर्णों को सीख चुके हैं उनकी समझ और ज्यादा मजबूत हो जाएगी.

कैसे करें मात्राओं की शुरुआतTips to teach kids alphabets

शब्द पढ़ने के साथ-साथ मात्राओं के साथ भी बच्चे का परिचय कराना जरूरी होता है. इसके लिए ध्यान रखना होगा कि बच्चा मात्राओं के प्रतीको के साथ उसकी आवाज से भी परिचित हो सके और मात्रा लगने से किसी वर्ण की आवाज में क्या बदलाव होता है इस बात को बच्चा समझ पाए. इसकी जानकारी के लिए मात्रा के प्रतीकों और उसकी ध्वनि को पहचानना सिखाना चाहिए.

इसके बाद वर्णों में मात्रा लगाने से उसकी आवाज में क्या परिवर्तन होता है? किसी शब्दांश को पढ़कर आप बच्चे को इसके बारे में समझा सकते हैं. जैसे ‘क’ में ई की मात्रा लगाने के बाद वह ‘की’ हो जाता है. ‘र’ में ई की मात्रा लगने से इसे ‘री’ पढ़ा जाता है. बच्चे को यह बात समझने का अवसर देना चाहिए.

अब इसके बाद वर्ण से मात्रा हटाकर पढ़ने का मौका दिया जा सकता है. इससे बच्चे को मात्रा का कांसेप्ट अच्छे से समझ में आता है और उसे बारहखड़ी रटने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे बच्चे को पढ़ने की रफ्तार भी उन बच्चों की तुलना में बहुत अच्छी हो जाती है, जिन्होंने बारहखड़ी को पहाड़े की तरह याद कर रखा है.

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