ब्रेन के दो नेटवर्क हैं आत्महत्या की मुख्य वजह!

आत्महत्या करने में इंसान का दोष नहीं बल्कि उसके दिमाग में स्थित दो नेटवर्क की वजह से ही कोई व्यक्ति आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होता है. Suicide

हमारे शरीर की तमाम गतिविधियां हमारे दिमाग पर ही निर्भर करती है. दिमाग के बिना शरीर कुछ भी नहीं है. या फिर यूं कहें कि शरीर मृत समान है. शरीर में होने वाली हर एक गतिविधियों का संचालन हमारा दिमाग (Suicide) ही करता है. हाल ही में हमारे ब्रेन को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा सामने आया है.

Human Brain

जिसमें वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क के अंदर दो प्रमुख नेटवर्क की पहचान की है. शोधकर्ताओं का कहना है कि किसी व्यक्ति के आत्महत्या (Suicide) करने के पीछे का कारण उसके मस्तिष्क में स्थित दो प्रमुख नेटवर्क हैं. आत्महत्या के मामले में यही दोनों नेटवर्क सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

यही नेटवर्क तय करता है कि कोई व्यक्ति आत्महत्या करेगा की नहीं. इन्हीं दोनों नेटवर्क क वजह से कई व्यक्ति आत्महत्या का प्रयास करते हैं तो कई सच में आत्महत्या कर लेता है. यही दो नेटवर्क है जो आत्महत्या के लिए उकसाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

यह शोध ब्रिटेन में कैंब्रिज विश्वविद्यालय में शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है. ब्रिटेन में कैंब्रिज विश्वविद्यालय में शोधकर्ताओं ने इस शोध के माध्यम से आत्महत्या (Suicide) को रोकने का प्रयास किया है. मॉलिकुलर साइकैट्री जर्नल में प्रकाशित रिसर्च में आत्मघाती विचारों व व्यवहारों के लिए ब्रेन इमेजिंग स्टडी की जिसमें दो दशकों की पूरी समीक्षा की गई.

12 हजार लोगों पर हुआ रिसर्च – Suicide

12 हजार से ज्यादा लोगों पर किए गए इस शोध में शोधकर्ताओं ने 131 शोधों को देखा है. इस शोध में पता चला है कि मस्तिष्क संरचना व कार्य में परिवर्तन किसी व्यक्ति में आत्महत्या के जोखिम को बढ़ा सकता है. शोध में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर 15-29 वर्ष की उम्र तक आत्महत्या दूसरा प्रमुख कारण है.

हृदय रोग, निमोनिया, कैंसर, एड्स जन्म दोष, स्ट्रोक, इंफ्लूएंजा व पुरानी फेफड़ों की बीमारी की तुलना मे आत्महत्या से अधिक किशोरों की मौत होती है. आंकड़ों के अनुसार हर साल आत्महत्या से विश्वभर में करीब 8 लाख लोगों की मौत होती है.  यानी प्रति 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है.  

नकारात्मक सोच में इस नेटवर्क की भूमिका–

किसी भी तरह का निर्णय लेने में मस्तिष्क के इस भाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. समस्याओं के वैकल्पिक समाधान उत्पन्न करने व व्यवहार को नियंत्रित करने के मामले में यह नेटवर्क हमारे दिमाग को बाधित करता है. शोधकर्ताओं का ये भी कहना है कि इस ब्रेन नेटवर्क की वजह से व्यक्ति में अपनी संरचना, कार्य के संदर्भ में बदलने से, ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जहां कोई व्यक्ति भविष्य के बारे में नकारात्मक सोचता है.

व्यक्ति अपने विचारों को नियंत्रित करने में असमर्थ हो सकते हैं. जिसकी वजह से ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होती है जहां कोई व्यक्ति आत्महत्या करने की कोशिश करता है. अमेरिका के येल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हिलेरी ब्लमबर्ग का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में आत्महत्या (Suicide) के जोखिम को कम करने के लिए नए और बेहतर तरीके ढ़ूंढने में यह नई स्टडी काभी मददगार साबित हो सकती है.

Suicide Case

शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क में संरचनात्मक, कार्यात्मक, और आणविक परिवर्तनों के साक्ष्य की तलाश की है, जो आत्महत्या (Suicide) के जोखिम को बढ़ा सकते हैं. शोधकर्ताओं ने दो मस्तिष्क नेटवर्क की पहचान की और उनके बीच संबंधों का अध्ययन किया. शोधकर्ताओं ने कहा कि इन नेटवर्कों में सबसे पहले मस्तिष्क के सामने वाले हिस्से को औसत दर्जे का और पैसिव वेंट्रल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के रूप में जाना जाता है और भावनाओं में शामिल मस्तिष्क के अन्य क्षेत्रों से उनके संबंध हैं.

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दो नेटवर्क की वजह से ही आते नकारात्मक विचार – Suicide

इस नेटवर्क में बदलाव से व्यक्ति में अत्यधिक नकारात्मक विचार पैदा हो सकते हैं और भावनाओं को संतुलित करने में कठिनाई हो सकती है. यही ब्रेन आत्महत्या के विचारों को उत्तेजित करते हैं और व्यक्ति इसे करने के लिए तैयार हो जाता है.

शोधकर्ताओं ने बताया कि दूसरे नेटवर्क में प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स और अवर फ्रंटल गाइरस सिस्टम के रूप में जाने जाने वाले क्षेत्र शामिल हैं. इस तरह ये नेटवर्क में आत्महत्या के प्रयास को प्रभावित करते हैं.#TwoBrainNetworks

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