Home Health Care इस बीमारी से ग्रसित थे महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह!

इस बीमारी से ग्रसित थे महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह!

जाने-माने गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. पिछले 40 वर्षों से वे मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया से ग्रसित थे. Mental Problem

जाने-माने गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. पटना के कुल्हरिया इलाका निवासी सिंह की गुरुवार अचानक तबीयत बिगड़ने (Mental Problem) पर उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

जानकारी के अनुसार उनकी तबीयत लंबे समय से खराब चल रही थी. वशिष्ठ नारायण सिंह बचपन से ही बहुत होनहार और गणित से उनको बेहद लगाव था. इन्होंने महान वैज्ञानिक आंइस्टाइन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी. जिसके बाद उनकी पूरी दुनिया में पहचान बनी थी.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. सीएम ने कहा कि इस निधन से वह दु:खी हैं. वह बहुत सम्मानित सज्जन थे. पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने भी वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर शोक जताया. मांझी ने कहा कि वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है.

गणितज्ञ का वीडियो हुआ वायरल –

एक रिपोर्टर ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा “ये पीएमसीएच कैंपस में महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर है, जिनके परिजनों को एम्बुलेंस तक मुहैया कराने की औपचारिकता अस्पताल प्रशासन ने नहीं निभाई.

शर्मनाक है ये! जिस आदमी की उपलब्धियों पर बिहार समेत देश गर्व करता है, अंत में भी उसके साथ ऐसा व्यवहार?” फिर ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो वायरल होने के बाद से हर कोई प्रशासन की उदासीनता पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

सिंह ने नासा के लिए भी किया काम – Mental Problem

सिंह 1965 से 1974 के बीच अमेरिका में थे. और इस दौरान उन्होंने नासा के लिए भी काम किया था. वर्ष 1974 में उनकी शादी हुई थी लेकिन 1976 में सिजोफ्रेनिया के पहले अटैक के बाद उनकी पत्नी ने उन्हें छोड़ दिया था. वशिष्ठ नारायण सिंह आईआईटी कानपुर, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (मुंबई) और भारतीय सांख्यिकीय संस्थान (कोलकाता) में भी पढ़ा चुके थे.

गरीब परिवार में हुआ था जन्म –

वशिष्ठ नारायण सिंह का जन्म बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था. सिंह जब‍ पटना साइंस कॉलेज में पढ़ रहे थे उसी समय कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन कैली की नजर उन पर पड़ी थी. इसके बाद वे 1965 में अमेरिका चले गए और वहीं से 1969 में पीएचडी भी की.

सिंह पिछले 40 वर्षों से मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया (Mental Problem) से पीड़ित थे. पिछले कई दिनों से बीमार चलने के दौरान उन्हें देखने कई नेता व मंत्री पहुंचे थे. अब जानते हैं कि ये मानसिक बीमारी क्या है.

क्या है ‘सिजोफ्रेनिया’?

सिजोफ्रेनिया एक ऐसी मानसिक बामारी (Mental Problem) है जो किसी भी व्यक्ति के सोचने समझने की क्षमता को नष्ट कर देती है. यह बीमारी आमतौर पर किशोरावस्था या शुरुआती वयस्कता में प्रकट होता है. यह बीमारी सबसे अधिक 16 से 30 वर्ष की आयु के बीच होता है.

पुरुषों में महिलाओं की तुलना में थोड़ी कम उम्र में इसके लक्षण दिखाई देते हैं. बहुत से लोगों को इस बात का अहसास ही नहीं होता कि उन्हें यह रोग है. क्योंकि इसके लक्षण बहुत लंबे समय बाद सामने आते हैं. यह एक प्रकार का मानसिक विकार है और इसकी वजह से व्यक्ति के सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने का तरीका प्रभावित होता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सिजोफ्रेनिया (Mental Problem) विश्व की दस सबसे घातक बीमारियों में शामिल है. वैश्विक स्तर पर 15 से 35 वर्ष की उम्र के लगभग ढ़ाई करोड़ लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं. अगर भारत की बात करें तो यहां भी लाखों लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं.

देशभर में हुए एक सर्वे के अनुसार भारत की सामान्य जनसंख्या का लगभग 13.7 प्रतिशत हिस्सा मानसिक बीमारियों से ग्रस्त है. जिसमें से लगभग 10.6 प्रतिशत लोगों को जल्द से जल्द मेडिकल केयर की जरूरत होती है.

मरीजों के लक्षण – Mental Problem

सिजोफ्रेनिया बीमारी (Mental Problem) से ग्रसित लोग दूसरों से दूर रहने लगते हैं और अकेले होते जाते हैं. उनका सोचने का तरीका भी सही नहीं रहका वे अटपटे तरीके से सोचते हैं. और हर बात पर शक करते हैं.

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ऐसे लोगों के परिवार में अक्सर पहले से मनोविकृति की समस्या चली आ रही होती है. युवाओं में ऐसी स्थिति को प्रोड्रोमल पीरियड कहा जाता है. सिजोफ्रेनिया के मरीजों को अन्य दिक्कतें भी हो सकती हैं जैसे कि किसी नशीले पदार्थ की लत, स्ट्रेस, और डिप्रेशन.

सिजोफ्रेनिया के कारण –

1. जिस परिवार में सिजोफ्रेनिया के मरीज का इतिहास रहता है उस परिवार में इस बीमारी से ग्रसित मरीज के होने की संभावना रहती है.

2. कुछ अध्ययनों के अनुसार वायरल संक्रमण के कारण बच्चों में एक प्रकार का पागलपन के विकास होने की संभावना ज्यादा रहती है.

3. गर्भावस्था के दौरान अगर भ्रूण कुपोषण से ग्रस्त है तो वहां एक प्रकार का पागलपन विकसित होने का अधिक खतरा बना रहता है.

4. प्रारंभिक जीवन में गंभीर तनाव के कारण एक प्रकार के पागलपन के विकास होने का खतरा रहता है.

5. जिनके माता-पिता की उम्र अधिक होती है उन बच्चों में इस बीमारी के होने की संभावना ज्यादा रहती है.

सिजोफ्रेनिया का इलाज –Mental Problem

1. सिजोफ्रेनिया सारी जिंदगी चलने वाली स्थिति है. हालांकि कैटेटोनिक लक्षण हमेशा रहे ऐसा जरूरी नहीं है.

2. सिजोफ्रेनिया के मरीजों को लंबे समय तक इलाज की आवश्यकता पड़ती है.

3. सभी प्रकार के सिजोफ्रेनिया का इलाज एक ही तरीके से किया जाता है.

4. बीमारी की गंभीरता और लक्षणों के आधार पर इसके इलाज के तरीकों में अंतर हो सकता है. #Schizophrenia

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