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बच्चों में इस वजह से होती है घरघराहट

बच्चे में घरघराहट कोई आम समस्या नहीं बल्कि किसी गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है. (Wheezing in children)

जब नन्हा मेहमान आने वाला होता है तो घर के हर सदस्य उसका बेसर्बी से इंतजार करते हैं. फिर घर में नवजात (Wheezing in children) का आगमन खुशियों भरा माहौल देता है. सिर्फ खुशियों भरा माहौल ही नहीं बल्कि घर में नई भाषा का भी आगमन होता है. हम उस भाषा की बात कर रहे हैं जिस भाषा के माध्यम से आपका शिशु आपसे बातें करता है. जैसे आपका बच्चा इशारों में, मुस्कुरा कर, कभी खिलखिला कर आपको हमेशा अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाता है.

Wheezing in children

लेकिन मुश्किल तब उत्पन्न होती है जब यही आवाज सामान्य से ज्यादा हो जाए. ऐसे में बगैर देरी किए आपको तुरंत चिकित्सक की सलाह लेने की आवश्यकता है. अगर बच्चे में घरघराने की आवाज आ रही है तो यह स्वास्थ्य संबंधी समस्या का भी संकेत हो सकता है.

इस संकेत को समझने के लिए यहां कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं- Wheezing in children

बच्चे में घरघराहट के कारण

छोटे बच्चों में विभिन्न परिस्थियों में घरघराने की आवाज आने लगती है. इसमें पाचन संबंधी समस्या समेत अन्य कारण भी हो सकते हैं. या फिर घरघराने की आवाज बच्चे की स्वास्थ्य समस्या, शारीरिक गतिविधि के अलावा आपके साथ बात करने की उत्सुकता भी हो सकती है. इसके अलावा और भी कुछ कारण हैं जिसके बारे में आपको विस्तृत जानकारी रखना जरूरी है.

सांस संबंधी दिक्कत

छोटे बच्चों में सांस लेने की समस्या तब होती है जब बच्चे में श्वसन के अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं. ज्यादातर यह समस्या प्री-मैच्योर बच्चों में होती है. लेकिन यह जरूरी नहीं है कि सिर्फ प्री-मैच्योर बच्चों में ही यह समस्या हो बल्कि साधारण जन्में बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं. बच्चों में घरघराहट (Wheezing in children) के साथ और भी कई संकेत हो सकते हैं, जैसे सांसों की गतिविधि असामान्य होना, नाक फूल जाना, त्वचा का रंग नीला होना आदि.

देरी से हो रहे शारीरिक विकास

प्री-मैच्योर बच्चों में कुछ अंग अविकसित होने के कारण भी उनमें घरघराहट जैसी समस्या देखने को मिलती है. इसे बच्चे के शारीरिक तंत्र को व्यवस्थित होने का भी संकेत कहा जाता है.

हृदय रोग

कई बार देखा जाता है कि हृदय की गंभीर समस्याओं की वजह से ही बच्चे में घरघराहट हो सकती है. बच्चे के फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने से भी सांस लेने में दिक्कत आती है.

सेप्सिस

सेप्सिस बहुत ही गंभीर समस्या है, जिसमें बच्चे में रक्त संक्रमण की समस्या होती है. इस समस्या के और भी कई संकेत हैं, जैसे बच्चे को सांस लेने में कठिनाई होने पर उसके घरघराने की आवाज आती है.

कैसे करें घरघराहट का उपचार – Wheezing in children

नवजात बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर हर माता-पिता का सतर्क रहना सामान्य सी बात है. लेकिन कभी-कभी बच्चे में होने वाली छोटी समस्या भी आपको चिंतित कर सकता है. इसमें बच्चे का घरघराना (Wheezing in children) डरावना संकेत भी दे सकता है. इसमें ध्यान रखना आवश्यक है कि बच्चे में घरघराहट एक सामान्य सी बात है, जब तक कि यह किसी गंभीर समस्या के कारण नहीं होता है. अब इस घरघराहट के उपचार के बारे में भी जान लेते हैं.

  • खाना खिलाने के बाद बच्चे को थोड़ी देर सीधी अवस्था में रख कर उसे कुछ देर आराम करने दें.
  • अपने शिशु को एक बार में ही अधिक दूध नहीं बल्कि पूरे दिन में थोड़ा-थोड़ा करके कई बार में दें.
  • एक बात का हमेशा ख्याल रखें कि अगर शिशु में घरघराहट धीरे-धीरे कमने की बजाय तेज होती जा रही है तो जल्द से जल्द चिकित्सक से संपर्क करें.

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निम्न संकेतों पर चिकित्सक से संपर्क करें – Wheezing in children

  • सांस लेने में असामान्यता मतलब अगर बच्चा एक मिनट में 60 से भी ज्यादा बार सांस लेता है तब.
  • सांस लेने के दौरान लगातार घरघराहट की आवाज आना.
  • कर्कश आवाज और खांसने पर भौंकने जैसी आवाज निकलना.
  • सांस का 10 सेकेंड से ज्यादा समय तक रूकना.
  • शिशु के नथुने का फूलना.
  • बच्चे के हाथ और पैर की अंगुलियां, होंठ और चेहरे का रंग नीला पड़ जाना. बच्चे के नाक, सिर और होठों के आसपास का रंग भी नीला होना. इस बीमारी को सायनोसिस कहते हैं. यह बीमारी तब होती है जब शिशु के रक्त में पेफड़ों से पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचती.
  • गर्दन और छाती की मांसपेशियां सामान्य से अधिक गहराई में भीतर और बाहर की तरफ जाते दिखना.
  • रात को सोते वक्त शिशु के सांस लेने की सामान्य क्रिया
  • सामान्य तौर पर बच्चा क्रमवार तरीके से सांस लेता है. धीरे-धीरे उसकी सांस बढ़ते-बढ़ते तेज और गहरी होने लगती है. फिर कुछ देर बार धीमी और हल्की होती है. इस क्रिया को सामयिक श्वसन क्रिया कहते हैं. कई बार तो बच्चा अपनी सांस को 5 सेकेंड तक या फिर इससे ज्यादा देर तक भी रोकने के बाद गहरी सांस लेता है.
  • शुरुआती कुछ महीनों में बच्चे की श्वसन क्रिया विकसित हो जाती है. इसके बाद वह कभी-कभी गहरी सांस लेता है.

अगर आपको यह जानना है कि आपका शिशु सामान्य तरीके से सांस ले रहा है कि नहीं तो इसे जानने के भी तीन तरीके हैं. जैसे –

1. पहले बच्चे के मुंह और नाक के पास अपना कान लगाकर उसके सांस की आवाज सुनें.

2. इसके बाद अब शिशु की छाती के स्तर तक उसके सांसों के ऊपर नीचे होने की हलचल को अपनी आंखों से देखें.

3. अब शिशु के मुंह और नाक के साथ अपने गाल को लगाकर उसकी सांस को अपनी त्वचा पर महसूस करें.

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