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World Nature Conservation Day: प्रकृति से संघर्ष कर हम क्या खो रहे हैं?

प्रकृति का इस धरती पर रहने वाले समस्त प्राणियों के जीवन से गहरा संबंध है. इसके संरक्षण के लिए अगर हम समय रहते सचेत नहीं होते हैं तो इसका दुष्परिणाम भी भूगतना होगा. Nature Conservation

साइंस के क्षेत्र में लगातार प्रगति व नए आविष्कारों की स्पर्धा के कारण आज का मनुष्य प्रकृति (Nature Conservation) पर पूरी तरह जीत हासिल करना चाहता है. यही वजह है कि वर्तमान में प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है. इंसान वैज्ञानिक उपलब्धियों को पाने के लिए प्राकृतिक संतुलन की उपेक्षा करने में लगा है.

Nature Conservation

औद्योगिकरण भी है कारण –

धरती को खुशहाल रखने के लिए हरियाली सबसे जरूरी (Nature Conservation) है. क्योंकि धरती से ही हमारी जीविका जुड़ी होती है. लेकिन निरंतर हो रहे औद्योगिकरण, शहरीकरण व जनसंख्या वृद्धि धरती को हरा-भरा रखने में बाधक साबित हो रही है.

या फिर यूं कहें कि अपने स्वार्थों की पूर्ति में इंसान का इस ओर ध्यान नहीं है. यही वजह है कि हरियाली बहुत ही तीव्र गति से समाप्त हो रही है.

ऐसे करें प्रकृति संरक्षण के प्रयास Green Conservation

1. सबसे अधिक हरियाली जंगलों में ही होती है. इसे नष्ट होने से बचाना हमारा कर्तव्य है.

2. भूगर्भ के जल को फिर से स्तर पर लाने के लिए बारिश के पानी को सहेजने की व्यवस्था करना.

3. पानी को नष्ट होने से बचाना भी सबसे जरूरी है. इसलिए पानी की फिजूल खर्ची बंद करें.

4. साइकिल का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना भी है फायदेमंद.

5. जरूरत से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करने से बचें.

6. ध्वनि प्रदूषण को कम करने का प्रयास करें.

7. कार्बन जैसी नशीली गैसों का उत्पादन बंद करना उचित.

8. उपयोग किए गए जल का चक्रीकरण करना भी लाभदायक है.

9. प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करना जरूरी.

10. जलवायु को उन्नत करने वाली तकनीकों को बढ़ावा दें.

>> धरती को बचाए रखना मानव समाज के लिए चुनौतीपूर्ण

11. पृथ्वी पर स्थित हर तत्व का अपना महत्व है. इसलिए पहाड़ों को नष्ट करने की अगर कोशिश हो रही हो तो उसका विरोध करें.

12. प्लास्टिक के लिफाफे त्याग कर अनावश्यक कागज के लिफाफे या फिर कपड़े के थैले का इस्तेमाल करें.

Tree conservation

पर्यावरण में जल, भूमि, वायु, पेड़-पौधे, जीव-जंतु, मानव व उसकी विविध गतिविधियों के समावेश को ही पर्यावरण कहा जाता है.

इसलिए धरती की रक्षा (Nature Conservation) के लिए इन तमाम चीजों का रहना आवश्यक है. यह जानते हुए भी व्यक्ति इस मामले में लापरवाह है.

यही वजह है कि दिन-प्रतिदिन इन प्राकृतिक चीजों का विनाश हो रहा है. यानी धीरे-धीरे सब विलुप्त होने के कगार पर हैं.

“जाग जाओ ! मत करो प्रकृति का शोषण, यह करती सभी जीवों का पोषण।”

इन प्राकृतिक संसाधनों का लगातार नष्ट होना कितनी गंभीर समस्या है इसे ध्यान में रखना नितांत आवश्यक है. साफ-साफ कहें तो इन सबके बिना धरती पर मानव जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती.

प्रकृति संरक्षण के महत्व को समझें Green Conservation

प्रकृति का इस धरती पर रहने वाले समस्त प्राणियों के जीवन से गहरा संबंध है. बढ़ते प्रदूषण ने पूरी पृथ्वी को दूषित कर दिया है. अगर यही स्थिति निरंतर जारी रहा तो भविष्य में मानव सभ्यता का अंत बहुत जल्द ही हो सकता है.

इस परिस्थिति को देखते हुए ही वर्ष 1992 में ब्राजील में विश्व के 174 देशों का पृथ्वी सम्मेलन आयोजित किया गया.

इसके बाद वर्ष 2002 में जोहान्सबर्ग में इसी सम्मेलन का आयोजन किया गया था. जिसमें सभी देशों से पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए उपाय सुझाए गए थे. क्योंकि अगर पर्यावरण का संरक्षण (Nature Conservation) होगा तभी धरती पर जीवन संरक्षित हो पाएगा.

वस्तुतः पर्यावरण के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण (Nature Conservation) हो सकता है, अन्यथा मंगल ग्रह आदि ग्रहों की तरह धरती का जीवन-चक्र भी एक दिन समाप्त हो जायेगा।

पर्यावरण संरक्षण के उपाय – Green Conservation

पर्यावरण प्रदूषण के दूरगामी दुष्प्रभाव को जानना जरूरी है, जो कि बहुत ही घातक है. जैसे वायुमंडल का तापमान बढ़ना, अजोन परत की हानि, आणविक विस्फोटों से रेडियोधर्मिता का अनुवांंशिक प्रभाव व भूक्षरण आदि घातक दुष्प्रभाव है.

वहीं जल, वायु, परिवेश का दूषित होना, वनस्पतियों का नष्ट होना, मनुष्य का विभिन्न रोगों से पीड़ित होना जैसे प्रत्यक्ष दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं.

प्रकृति के प्रति जागरूक रहने की जिम्मेवारी मानव समाज की है. समय रहते अगर हम नहीं चेतेंगे तो इसका बुरा प्रभाव बहुत जल्द ही दिखने वाला है. #WorldNatureConservationDay

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